अपनी दादी इंदिरा गांधी के जन्म शती समारोह पर स्वराज भवन आईं प्रियंका गांधी ने सक्रिय राजनीति में आने के संकेत दिए हैं। भले ही वह राजनीतिक आयोजनों और किसी भी तरह का बयान देने से बचती रहीं लेकिन कार्यकर्ताओं से मुलाकात के दौरान सिर्फ सियासी मुद्दों पर बात की। जो कार्यकर्ता स्वराज भवन में प्रवेश नहीं कर सके, वह बाहर से प्रियंका के सक्रिय राजनीति में आने की मांग को लेकर नारेबाजी करते रहे और जिनकी प्रियंका से मुलाकात हुई, उन्होंने सीधे तौर पर प्रियंका से यूपी में पार्टी की कमान संभालने की मांग की। प्रियंका ने भी कार्यकर्ताओं को हताश नहीं किया। उन्होंने आश्वस्त किया कि इस बारे में जल्द ही कोई निर्णय लेंगी।
समारोह में शामिल कांग्रेसी नेता फुजैल हाशमी ने जब प्रियंका को बताया कि उनकी तीन पीढ़ियां नेहरू परिवार से जुड़ी रही हैं और अल्पसंख्यक समुदाय चाहता है कि प्रियंका सक्रिय राजनीति में आएं तो जवाब मिला, ‘वक्त आने दीजिए। पार्टी कार्यकर्ताओं को हताश नहीं करुंगी।’ समारोह में प्रियंका से जो भी मिला, उसने यही सवाल किया कि वह सक्रिय राजनीति में कब आएंगी। मंगलवार सुबह पार्टी नेता अभिन्न वार्ष्णेय, डॉ. सत्या पांडेय, किशोर वार्ष्णेय समेत कई कार्यकर्ताओं से प्रियंका ने मुलाकात की। सबने यही मुद्दा उठाया। नंद गोपाल गुप्ता नंदी से मुलाकात के दौरान प्रियंका ने संगठन पर चर्चा की तो यह भी कहा कि नोट बंदी के मुद्दे पर पार्टी और सक्रिय हो। धरना-प्रदर्शन लगातार हों और कार्यकर्ता जनता के साथ खड़े हों।
प्रियंका से मुलाकात के दौरान पार्टी के कई नेताओं ने तो यहां तक मांग उठाई कि पंडित नेहरू के जाने के बाद से फूलपुर संसदीय क्षेत्र दुर्दशा का शिकार है। कांग्रेस यहां कमजोर हैं। अगर प्रियंका 2019 के लोकसभा चुनाव में इस सीट से चुनाव लड़ जाएं तो पार्टी को अपनी विरासत वापस मिल जाएगी। प्रियंका ने धैर्य के साथ सबको सुना और मुस्कुराते हुए बोलीं, ‘दिल्ली लौटकर कार्यकर्ताओं की सभी बातों पर विचार करुंगी और उचित समय आने पर निर्णय भी लूंगी।’ प्रियंका ने साफ तौर पर तो कुछ नहीं कहा लेकिन उनकी ओर से कांग्रेसियों को मिला आश्वासन ही उन्हें उत्साहित करने के लिए काफी था। नेहरू की कर्मस्थली और इंदिरा की जन्म स्थली पर सियासत में हलचल मचा गईं प्रियंका गांधी को लेकर फिर नई बहस छिड़ गई है।