कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने प्रयाग से काशी की अपनी जलयात्रा की शुरुआत नाव पर चर्चा से की। इस दौरान इविवि व शुआट्स की छात्राओं से उन्होंने मन की बात की। दादी इंदिरा के साथ की स्मृतियों को साझा किया। प्रियंका बेटियों को उत्साहित किया। कहा कि वह किसी के भरोसे पर जिंदगी को आगे बढ़ाने की सोचें। खुद के साहस वह लगन से लक्ष्य भेदकर आगे बढ़ने का सपना साकार करें। वक्त आपका होगा।
प्रियंका गांधी ने मनैया से दुमदुमा घाट के बीच इलाहाबाद विश्वविद्यालय की छात्राओं से नाव पर चर्चा की, जबकि सिरसा से लाक्षागृह के बीच वह शुआट्स की छात्राओं के साथ रहीं। शुआट्स की छात्रा सानिया अब्बास ने प्रियंका के साथ घंटे भर के सफर को बखूबी बयां किया। बताया कि वह प्रियंका के साथ खाते-पीते बात करते रहे। इस दौरान वह अपनी दादी इंदिरा गांधी के साथ की यादों को साझा करती रहीं। उनके साहस और कड़े फैसले लेने की क्षमता को आज की हर नारी से प्रेरणा लेने की सीख देती रहीं।
जब प्रियंका से सानिया ने पूछा कि इतने लंबे समय तक वह चुप क्यों थीं। राजनीति में न आने की क्या वजह थी? इस पर प्रियंका ने बताया कि दादी के बाद हम लोगों के सिर से बचपन में ही पापा का साया उठ गया। देश के लिए उनको प्राण न्यौछावर करना पड़ा। लगातार मेरे परिवार पर हमले होते रहे। राजनीति में हमेशा खतरों का सामना करना पड़ता है। उन दिनों को याद कर हमेशा सोचती रही कि जिस तरह की परिस्थितियों का सामना मुझे करना पड़ा, वैसा मेरे बच्चों को न करना पड़े। इसलिए जब बच्चे बड़े हो गए और वह सोचने-समझने लायक हो गए, तब अब मैं देश की खातिर घर से निकल पड़ी हूं।
प्रियंका ने छात्राओं को समझाने की कोशिश की उन्हें खुद को कभी कमजोर नहीं समझना चाहिए। हिबा फातिमा ने समाज के बिगड़े वातावरण के चलते लड़कियों में असुरक्षा की भावना बढ़ने की बात कही। बताया कि कानून तो बनते हैं लेकिन उस पर अमल नहीं होता। इस पर प्रियंका ने कहा कि उनकी सरकार आएगी तो इस पर वह प्राथमिकता से विचार करेंगी। नाव पर चर्चा में अरीशा खान, रितु सिंह, विदुषी खन्ना, शिप्रा सिंह, दीपांजलि साहू, अरुणिमा पीटर, कृतिका गुप्ता सबरजीत चावला समेत 15 छात्र-छात्राएं शामिल थे। इस प्रतिनिधिमंडल में पीसीसी सदस्य परवेज अख्तर अंसारी के नेतृत्व में पहुंचा था।