कुंभ के दौरान शहर में सफाई की चाक-चौबंद व्यवस्था के बावजूद प्रयागराज सफाई सर्वेक्षण में पहले सौ शहरों में शामिल होने से चूक गया। देश भर के 4237 शहरों के बीच हुए स्वच्छता सर्वेक्षण में प्रयागराज को 141 वें स्थान से संतोष करना पड़ा जबकि यूपी के शहरों के बीच उसका दसवां नंबर रहा। झांसी, सहारनपुर, बरेली जैसे छोटे शहर प्रयागराज से आगे रहे हालांकि नगर निगम अधिकारियों के लिए संतोष की बात यह रही कि प्रयागराज ने अपनी पिछली रैंकिंग सुधारने में कामयाबी हासिल की है। पिछली बार प्रयागराज की रैंकिंग 232 आई थी।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय देश भर में शहरों की सफाई आंकने को सर्वे कराता है। इस बार करीब तीन माह पहले परिणाम जारी कर दिए गए। प्रयागराज के प्रथम सौ शहरों में आने को लेकर शुरुआत से ही दावे किए जा रहे थे लेकिन, बुधवार को आए परिणाम मन मुताबिक नहीं रहे। कुंभ को देखते हुए सरकार का यहां सफाई पर खास जोर था। इसके लिए प्रयागराज को ढाई हजार अतिरिक्त सफाईकर्मियों के अलावा 40 कंपैक्टर, 5 हाइवा, 11 डंपर, 350 ई-रिक्शा, सड़क-मूर्तियां धुलने को पांच प्रेशर मशीनें समेत करोड़ों के अतिरिक्त उपकरण मुहैया कराए गए। सड़कों से धूल हटाने को नई मशीनें दी गईं।
सड़काें से कूड़ा खत्म करने को पोर्ट स्टेशन बनवाए गए लेकिन डोर-टू-डोर कूड़ा उठवाने की लचर व्यवस्था और बसवार में कूड़े का नियमित प्रोसेस न होने से इन सब पर पानी फिर गया। जबकि, सरकार का सबसे अधिक जोर सालिड वेस्ट मैनजमेंट पर ही रहता है। इसके अलावा निगम प्रशासन गीला-सूखा कूड़ा अलग एकत्र करने की व्यवस्था को भी अमली जामा नहीं पहना सका। पब्लिक कनेक्ट के लिए ऐप के जरिए सीवर, गंदगी जैसी शिकायतें निपटाई जानी थी लेकिन आम लोगों को निगम अधिकारी यह भरोसा दिला पाने में कामयाब नहीं हो सके। नतीजतन प्रयागराज को इन्हीं सब मोर्चा पर नंबर गंवाने पड़े। वहीं, साफ-सुथरी सड़क, मलवामुक्त शहर, साफ सुथरी सार्वजनिक दीवार, स्वच्छ सार्वजनिक शौचालयों के चलते प्रयागराज के खाते में नंबर जुड़े।