अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने बताया कि उत्तर प्रदेश जल निगम शहरी तथा ग्रामीण, दो भागों में विभक्त कर दिया गया है। दोनों नमामि गंगे तथा ग्रामीण जल आपूर्ति विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में है। शहरी क्षेत्रों में ओवर हेड टैंक तथा ट्यूबवेल से सीधे जल आपूर्ति की जा रही है। फ्लोराइड से बचाव के उपाय किए गए हैं।
पांच हजार लीटर की क्षमता की आरओ मशीन लगाई गई है। अच्छेंद्र नगर तथा फतेहाबाद नगर के भूगर्भ जल में फ्लोराइड की मात्रा अधिक है। किंतु ग्रामीण क्षेत्र की जल आपूर्ति के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई, जिसे कोर्ट ने सही न मानते हुए प्रमुख सचिव नमामि गंगे को तलब किया है। याचिका की सुनवाई 24 फरवरी को होगी।