प्लॉट खरीदने वालों की ओर से भी अर्जी देकर कहा गया कि उनको प्लॉट या आवास नहीं सौंपा जा रहा है। राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता नीरज त्रिपाठी तथा याचिका पर अधिवक्ता शैलेश सिंह, वीसी श्रीवास्तव, न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण कुमार गुप्ता और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से अधिवक्ता डॉ.हरि नाथ त्रिपाठी ने पक्ष रखा।
कोर्ट ने सरकार के हलफनामे का जवाब दाखिल करने के लिए अधिवक्ताओं को अनुमति दी है। न्यायमित्र गुप्ता ने कहा, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कानपुर में 403 चमड़ा उद्योगों को ही अनापत्ति दी है। इस पर कोर्ट ने कहा, 1300 से अधिक उद्योगों को सरकार तथा बोर्ड ने बंद करने की बात कही है। शोधन प्लांट के ठीक से काम न करने का भी मुद्दा उठाया गया। याचिका की सुनवाई 14 दिसंबर को होगी।