प्रयागराज एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थान है। यहां दुनिया भर से पर्यटक आते हैं। बड़ी स्थानीय आबादी के बावजूद कई वर्षों से इसकी उपेक्षा क्यों की जा रही है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली से मेडिकल कॉलेजों के अस्पतालों पर मरीजों की भीड़ है। ऐसे में प्रदेश के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत करने के बारे में क्या योजना है। इस पर भी प्रमुख सचिव से जानकारी मांगी गई है।
कोर्ट ने प्रमुख सचिव चिकित्सा को निर्देश दिया कि अगली निर्धारित तिथि तक सभी राज्य चिकित्सा महाविद्यालयों का दौरा करें ताकि उन्हें अस्पतालों की आवश्यकताओं और बदहाली की जानकारी हो सके। अगली सुनवाई में प्रयागराज के जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस आयुक्त, नगर निगम, प्रयागराज के नगर आयुक्त, स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक, उपअधीक्षक और मुख्य चिकित्सा अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे।
कुंभ 2031 से पहले एसआरएन में तीन हजार बेड करने का निर्देश
कोर्ट ने कहा कि महाकुंभ 2025 में लगभग 66 करोड़ लोग स्नान करने आए। इस पर ध्यान देते हुए अगले कुंभ (2031) तक स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल में मौजूदा 1250 बेड को बढ़ाकर कम से कम 3000 बेड किया जाना चाहिए।
लखनऊ प्रदेश की तो प्रयागराज न्याय की राजधानी है : हाईकोर्ट
कोर्ट ने कहा कि लखनऊ अगर प्रदेश की राजधानी है तो प्रयागराज प्रदेश में न्याय की राजधानी है। इसके बाद भी राज्य सरकार का पूरा ध्यान सिर्फ लखनऊ की तरफ है। लखनऊ में चिकित्सा बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान दिया जा रहा है। वहीं प्रयागराज सहित अन्य शहरों के लोगों को चिकित्सा सहायता से वंचित किया जा रहा है। ऐसे में लोगों को इलाज के लिए लखनऊ या दिल्ली जाना पड़ता है। करदाताओं का पैसा पूरे राज्य में समान रूप से खर्च किया जाना चाहिए न कि किसी विशेष शहर को चिकित्सा केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि सभी लोग इतने सक्षम नहीं है कि इलाज के लिए लखनऊ या दिल्ली जा सकें। साथ ही कोर्ट ने कहा कि प्रयागराज इतना बड़ा जिला है और स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर यहां पर कुछ भी नहीं है। यहां पर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट की स्थापना की जानी चाहिए।