पांच सौ हजार के नोट बंद होने के बाद जिन व्यापारियों ने 10 नवंबर से बैंकों में रकम जमा करना शुरू किया, आयकर विभाग ने उनकी टेंशन बढ़ा दी है। आयकर मुख्यालय दिल्ली से शहर के तकरीबन डेढ़ हजार व्यापारियों को नोटिस भेजा है। कुछ के पास नोटिस मंगलवार को पहुंचा। अगले कुछ दिनों में काफी व्यापारियों के साथ डॉक्टर, पेशेवर आदि भी नोटिस का शिकार बनेंगे। सराफा, सीमेंट, किराना, लोहा आदि के यह ऐसे कारोबारी हैं जिन्होंने 10 नवंबर के बाद बैंक खातों में 2.50 लाख रुपये से अधिक रकम जमा की है। नोटिस में पूछे गए सवाल व्यापारियों के लिए मुसीबत बन गए हैं। व्यापारियों ने पूछा गया है कि सामान की बिक्री के लिए किसी ने दबाव में नोट दिया तो उसका नाम बताएं। अगर नोट किसी लालच में ली गई तो उसका कारण भी नोटिस में बताना होगा।
कई व्यापारियों के पास आयकर मुख्यालय का नोटिस मंगलवार को पहुंचा है। उनके साथ ट्रस्ट से संचालित स्कूल, हॉस्पिटलों आदि को भी नोटिस भेजा गया है। यह सभी ऐसे लोग हैं जिन्होंने 10 नवंबर के बाद बैंकों में मोटी रकम जमा की है। नोटिस में पूछा गया है कि 31 मार्च 2016 को आपके पास कितनी नगद राशि थी। आठ नवंबर की रात कारोबार बंद करने तक कितनी नगद राशि(रोकड़) उनके पास थी। प्रतिष्ठान की अन्य शाखाएं हैं तो उनमें तय तिथियों तक नगद की क्या स्थिति थी। संस्था के माध्यम से स्कूल, अस्पताल चलाने वालों के पास भी आयकर का नोटिस पहुंच चुका है। उसने भी वही जवाब मांगे गए हैं।
नोटिस में 10 नवंबर से बैंक में जमा रकम का स्रोत पूछा गया है। जिन लोगों को नोटिस मिला है, उन्हें पूरा ब्योरा कैश बुक, लेजर, बैंक खातों से तस्दीक करने के बाद ही देना होगा। यह जानकारी 18 नवंबर तक आयकर विभाग को देनी होगी। नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जवाब ई-मेल, स्पीड पोस्ट से या फिर कार्यालय में खुले काउंटर में बंद लिफाफे में जमा करें। जिन लोगों को नोटिस मिला है, वह इसलिए भी ज्यादा परेशान हैं क्योंकि नोटिस सीधे मुख्यालय से भेजा गया है। इससे यह भी साफ हो गया है कि आयकर विभाग देशभर में व्यापारियों के साथ हर ऐसे व्यक्ति पर नजर रखे हुए है, जिन्होंने 10 नवंबर और उससे बाद 2.50 लाख रुपये या उससे अधिक रकम बैंक में जमा की है।