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माघ मेला को मिनी कुंभ बनाने की तैयारी

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Preparing to make Mini Aquarium for Magh Mela
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माघ मेला को मिनी कुंभ बनाने की तैयारी शुरू
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0 अफसरों की तैनाती संग सेना के अफसरों संग हुई वार्ता
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। माघ मेला को मिनी कुंभ बनाने की तैयारी अभी से शुरू हो गई है। एडीएम सिटी अशोक कुमार कनौजिया को वरिष्ठ प्रभारी माघ मेला बनाया गया है। पीडीए के सचिव दयानंद को सेनिटेशन का प्रभारी बनाया गया है। वहीं, एसएलओ अनिल चतुर्वेदी को कनिष्ठ सहायक की जिम्मेदारी दी गई है।
इसी क्रम में सिविल सैन्य समन्वय समिति की सोमवार को सर्किट हाउस में हुई बैठक में आयोजन का खाका खींचा गया। उसमें मेला क्षेत्र के अधिग्रहण का मुद्दा भी उठा। बैठक में मेला क्षेत्र की सफाई, अन्य तैयारियों के साथ पार्किंग को लेकर चर्चा हुई। कुंभ के दौरान विकास योजनाओं के लिए कई जगहों पर सेना की जमीन ली गई है। इसके अलावा कई अन्य प्रस्तावों के लिए भी सेना की जमीन ली जानी है। उसकी जगह प्रशासन को नए स्थान पर जमीन देनी है या फिर नगद भुगतान करना है। बैठक में उस पर भी विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में सेना से संबंधित अन्य बिंदुओं पर भी चर्चा हुई।
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(सेना नीलाम करेगी परेड में रखे सामान वाली खबर के साथ)
मेला क्षेत्र का एसएसपी कार्यालय भी होगा ध्वस्त
0 मेला क्षेत्र स्थित एसएसपी ऑफिस को भी गिराए जाने की तैयारी शुरू हो गई है। सेना ने इसे हटाने के लिए पुलिस प्रशासन को 31 जुलाई तक का समय दिया है। सेना की ओर से नोदिस दिया गया है कि 30 जून तक ही परेड मैदान लीज पर दिया गया था। ऐसे में वहां स्थायी निर्माण कैसे करा लिया गया। सेना के अफसरों ने एक अगस्त को कार्यालय के ध्वस्तीकरण के लिए कहा है। वहीं, पुलिस विभाग के अफसरों का कहना है कि परेड में माघ मेला की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसलिए पूरे क्षेत्र को फिर से लीज पर लिए जाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। सोमवार को सिविल सेना समन्वय समिति की बैठक में भी इस पर चर्चा हुई। वहीं डीआईजी केपी सिंह का कहना है कि सेना मुख्यालय को लिखा गया है। नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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सेना का रुख स्पष्ट, अधूरा पड़ा है बेगम बाजार पुल
0 सेना अपने रुख पर कायम रहती है तो परेड मैदान में सामान छोड़ने वाले विभागों की समस्या बढ़ सकती है। अधूरा पड़ा बेगम बाजार पुल सेना की सख्ती का उदाहरण है। इस पुल का बड़ा हिस्सा तैयार हो चुका है। बस थोड़ा सा निर्माण बचा है लेकिन करोड़ों रुपये खर्च करके बने इस पुल के आगे के निर्माण पर सेना ने रोक लगा दी। मंडलायुक्त, डीएम के अलावा प्रदेश सरकार की ओर से भी इस पुल के निर्माण के प्रयास किए गए लेकिन करीब नौ महीने बाद भी इसे लेकर गतिरोध बना हुआ है और काम शुरू नहीं हो सका। आगे भी निर्माण को लेकर सकारात्मक संकेत नहीं मिल रहे। बेगम बाजार पुल का यह उदाहरण परेड में सामान छोड़ने तथा गोदाम बनाने वाले विभाग के अफसरों के सामने भी है। इसे लेकर उनमें डर भी है कि समय रहते समस्या का समाधान नहीं निकला तो सेना उनके सामानों की नीलामी करने से पीछे नहीं हटेगी।
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