पौष पूर्णिमा के लिए प्रशासन ने तैयारियां तो बहुत की लेकिन स्नान पर्व के दिन घाट खाली ही रह गए। मेले में भीड़ बहुत कम पहुंची। प्रशासन ने भी माना कि अनुमान से आधी भीड़ ही मेले में पहंची। इसके बावजूद प्रशासन 25 लाख स्नानार्थियों के आने का दावा कर रहा है लेकिन संख्या इससे भी कम नजर आई। फिलहाल जो स्नान करने पहुंचे, उन्हें पर्याप्त जल मिला और घाट पर जगह भी खूब मिली।
प्रशासन का अनुमान था कि पौष पूर्णिमा पर 50 लाख स्नानार्थी मेला क्षेत्र पहुंचेंगे। प्रशासन ने इसी हिसाब से तैयारियां की थीं। कुदरत ने भी साथ दिया और पौष पूर्णिमा के स्नान पर्व तक संगम नोज सहित सभी 14 घाटों पर अतिरिक्त जगह निकल आई। पिछले 20 वर्षों में इस बार संगम नोज पर सबसे बड़ा घाट बनाया गया। स्नान पर्व से एक दिन पहले यानी शनिवार को गंगा का जलस्तर भी अचानक बढ़ा और घाटों पर स्नान के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध रहा। संभावित भीड़ के मद्देनजर संगम घाट सहित सभी घाटों पर चेंजिंग रूम की संख्या बढ़ा दी गई।
साथ ही 20-20 सीट वाले दो बायो टॉयलेट और सात यूरिनल भी घाटों के आसपास रखवा दिए गए ताकि गंदगी न हो और स्नानार्थी असुविधा से बच सकें। इसके साथ ही सुरक्षा की चाक-चौबंद व्यवस्था की गई लेकिन रविवार को पौष पूर्णिमा का स्नान पर्व शुरू होने के बाद घाटों पर भीड़ बहुत कम नजर आई। डीएम संजय कुमार का दावा है कि पौष पूर्णिमा पर 25 लाख श्रद्धालुओं ने संगम एवं अन्य घाटों पर स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया। हालांकि उनके दावे के विपरीत भीड़ इससे बहुत कम दिखी। रेलवे स्टशनों और बस अड्डों पर भी सन्नाटा छाया रहा। यहां तक कि रोज के मुकाबले रविवार को टिकटों की बिक्री भी औसत से बहुत कम हुई।