केशव चंद्र वर्मा की बेटी प्रोफेसर वंदिता वर्मा कहती हैं, वह हमारे परिवार के सदस्य जैसे थे। पिता जी की पहली पुण्यतिथि पर वर्ष वह वर्ष 2008 में संगीत समिति में हुए कार्यक्रम में आए थे। वह विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह सहित सरोजिनी नायडू छात्रावास के कार्यक्रम में भी आए थे। बीच-बीच में कई बार आते थे। संभवत: वह वर्ष 2018 में किसी कार्यक्रम में वाराणसी जाते वक्त यहां कुछ घंटों के लिए रुके थे। बेटी की तरह मानने वाले पं.जसराज ने अपने सबसे प्रिय शिष्य गिरीश बजलवार जी से मेरा विवाह कराया।
वह इतने सहज थे कि एक बार रिक्शे से अकेले ही प्रयाग संगीत समिति चले गए। वहां पहुंचने पर गार्ड ने उन्हें रोक दिया। उन्होंने कहा, मेरा कार्यक्रम है, मैं ही पं.जसराज हूं। फिर भी गार्ड नहीं माना, बोला, चलिए चलिए सभी ऐसे ही कहते हैं। इस बीच समिति के किसी अधिकारी ने उन्हें पहचाना और आदरपूर्वक भीतर ले गया। उन्हें रसमलाई बहुत पसंद थी लेकिन, वह अपनी तबीयत का बहुत ख्याल रखते थे।