मांडा के आंधी गांव में हुए तिहरे हत्याकांड की जांच पड़ताल में पुलिस सुबह से रात तक लगी रही लेकिन इसकी वजह सामने नहीं आ सकी। जांच के दौरान कुछ छोटे-मोटे विवादों का तो पता चला है लेकिन कोई ठोस वजह सामने नहीं आई । पुलिस का कहना है कि पारिवारिक रंजिश के साथ ही कई अन्य बिंदुओं को भी ध्यान में रखकर जांच की जा रही है।
घटना के बाद मौके पर पहुंचे पुलिस अफसरों ने पूछताछ शुरू की तो परिजन हत्या की कोई ठोस वजह नहीं बता सके। हालांकि उन्होंने कुछ विवादों के बाबत जानकारी जरूर दी। बताया कि नंदलाल की छोटी बहू यानी कमलेश की पत्नी आरती, यहीं रहती थी। लेकिन चार दिन पहले वह नाराज होकर मायके चली गई। इसके अगले ही दिन आरती के भाइयों ने आकर नंदलाल व उसकी पत्नी को धमकाया था। कहा था कि बहन की बेइज्जती का बदला वह लेकर रहेंगे। उधर, ग्राम समाज की एक जमीन को लेकर भी नंदलाल का गांव के कुछ लोगों से विवाद होने की जानकारी मिली है। इसके अलावा गांव के ही एक व्यक्ति से मकान को लेकर भी उसका काफी वक्त पहले झगड़ा होने की बात सामने आई है।
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पारिवारिक रंजिश के अलावा पुलिस की नजर घुमंतू गिरोहों पर भी है। दरअसल, जिले में पूर्व में ऐसे कई जघन्य हत्याकांड की वारदातें हो चुकी हैं जिनमें घुमंतू गिरोहों का हाथ होने का खुलासा हुआ। ऐसे में पुलिस इस बिंदु को भी ध्यान में रखकर जांच में जुटी है। उधर, क्राइम ब्रांच की एक टीम ने कुछ स्थानीय बदमाशों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि नशे की हालत में कहीं सुनसान में घर देख स्थानीय बदमाशों ने तो वारदात अंजाम नहीं दी। यह भी पता लगाया जा रहा है कि कोई युवक किशोरी पर गलत निगाह तो नहीं रखता था। फिलहाल पुलिस कई एंगल पर जांच कर रही है। एसपी यमुनापार दीपेंद्र नाथ चौधरी का कहना है कि हर संभावित बिंदु को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है। कई स्थानीय बदमाशों से भी पूछताछ की गई है। मृतक के बहू के मायकेवालों को भी पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा।
कड़ी सुरक्षा के बीच हुआ तीनों शवों का अंतिम संस्कार
पोस्टमार्टम के बाद तीनों शवों को शाम छह बजे के करीब नरवर चौकठा गंगाघाट पर ले जाया गया। जहां कड़ी सुरक्षा के बीच अंतिम संस्कार किया गया। तीनों शवों को एक ही चिता पर रखकर बड़े बेटे रामबहादुर ने मुखाग्नि दी। एक साथ तीन चिताएं देेख वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें नम हो गईं। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौजूद थे। अपनों को मुखाग्नि देते वक्त रामबहादुर भी फूट-फूटकर रोता रहा। उसकी हालत देख ग्रामीण भी अपने आंसू रोक नहीं सके। सुरक्षा के दृष्टि से वहां मांडा व मेजा के साथ ही कई अन्य थानों की फोर्स भी बुला ली गई थी और घाट को अंतिम संस्कार होने तक छावनी में तब्दील रखा गया। एसपी यमुनापार के साथ ही सीओ भी मौके पर डटे रहे।