Prayagraj: Three dozen animals die in the swamp of Gosha of Yogi
- फोटो : SIRSA
दलदल में तब्दील हुई कान्हा गोशाला,35 गोवंश की मौत
क्रासर
जिंदा बचे 317 पशुओं को अफसरों ने आनन-फानन में दूसरी जगह स्थानांतरित कराया
डीएम-सीडीओ ने घटना स्थल का लिया जायजा, जांच के निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
सहसों। पहली बारिश में दलदल में तब्दील हुई बहादुरपुर ब्लाक के कादी गांव की कान्हा गोशाला में 35 से अधिक गोवंश की मौत हो गई। पानी भरने से तालाब बनी गोशाला में बृहस्पतिवार की सुबह एक पर एक पड़े मवेशियों के शव देख हड़कंप मच गया। मरे हुए पशुओं के शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवाए गए, जबकि जिंदा बचे मवेशियों को अफसरों अन्यत्र स्थानांतरित करवा दिया। जानकारी मिलने पर डीएम और सीडीओ ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। बीडीओ चंद्रप्रकाश श्रीवास्तव ने बिजली गिरने से भगदड़ के कारण पशुओं की मौत होने की बात कही है, लेकिन वहां दूर -दूर तक ऐसे निशान तक नहीं मिले। डीएम ने इस घटना की जांच के निर्देश दिए हैं।
गोवंश की रक्षा के लिए करोड़ों रुपये का बजट जारी किए जाने के बाद कादी गांव में वर्ष भर से अस्थाई गोशाला बनाकर बेसहारा पशुओं को रखा गया था। इस गोशाला बृहस्पतिवार की सुबह 35गोवंश मृत पाए गए। करीब दो बीघा क्षेत्रफल में मिट्टी की मेड़ बनाकर घेरी गई यह गोशाला बीते तीन दिनों से लागातार हो रही बारिश के तलते तालाब का रूप ले चुकी है। एक साथ तीन दर्जन से अधिक पशुओं की मौत की जानकारी से गांव समेत पूरे प्रशासन में अफरा तफरी मच गई। खंड विकास अधिकारी व पशु चिकित्सा अधिकारी के अलावा दर्जन भर से अधिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए। गोशाला में छटपटा रहे 317 गोवंश को दूसरी जगह स्थानांतरित कराया गया। शाम के डीएम भानुचंद्र गोस्वामी व सीडीओ अरविंद सिंह ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर प्रधान व बीडीओ से पशुओं की मौत के बारे में जानकारी ली। पता चला कि गोशाला में ही चरनी के पास पशुओं की प्यास बुझाने के लिए तालाबनुमा गड्ढा बना गया था। बारिश की वजह से उसमें पानी भर गया है। साथ ही आसपास की कच्ची मिट्टी कीचड़ से सराबोर हो गई है। इस अस्थाई पशुशाला की क्षमता महज 50 पशुओं के रखे जाने की है, जबकि वहां सात गुना अधिक मवेशियों को ढूंस कर रखा गया था।पशुचिकित्साधिकारी डॉ चंदन सिंह शर्मा ने सफाई दी कि चार बजे भोर में बिजली गिरने से 22 पशुओं की मौके पर मौत हो गई, जबकि 13 गंभीर रुप से झुलस गए। झुलसे पशुओं में से छह ने दोपहर एक बजे तक दम तोड़ दिया। शेष सात पशुओं का उपचार किया जा रहा था, लेकिन उन्हें भी नहीं बचाया जा सका।
कोट
घटनास्थल का मुआयना करने से प्रतीत होता है कि पशुओं की मौत बिजली गिरने से ही हुई है। हालांकि अन्य पहलुओं से भी मौत के कारणों का पता लगाया जा रहा है। अरविंद कुमार सिंह, मुख्य विकास अधिकारी।