मऊआइमा के दुबाही नहर के पास तेज रफ़्तार ब्रेजा कार की टक्कर से बाइक सवार मां-बेटे की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि युवक की चाची गंभीर रूप से घायल हो गई। तीनों एक शादी समारोह से वापस लौट रहे थे। घटना के बाद परिजन भी रोते-बिलखते हुए मौके पर पहुंचे, जहां कोहराम मचा रहा। घटना में कार भी पलट गई थी। कार चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
थाना मऊआइमा बुआपुर (भानेमऊ) गांव निवासी राकेश कुमार का पुत्र गुलशन (18) मां सुधा देवी (35) तथा चाची मनोरमा देवी (32) पत्नी राजेंद्र कुमार को बाइक पर बैठाकर जनपद प्रतापगढ़ थाना रानीगंज दुर्गागंज में रहने वाले रिश्तेदार के यहां शादी में शामिल होकर घर वापस आ रहा था। गुरुवार की रात जैसे ही वह बाइक से मऊआइमा के दुबाही नहर के पास पहुंचा, तेज रफ्तार ब्रेजा कार ने बाइक में जोरदार टक्कर मारी और अनियंत्रित होकर पलट गई। घटना के बाद बाइक चला रहे गुलशन (18) और उसकी मां सुधा देवी (35) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बाइक पर पीछे बैठी मनोरमा देवी गंभीर रूप से जख्मी हो गईं। वहीं कार में सवार लोगों को भी चोटें आईं।
मऊआइमा के दुबाही नहर के पास तेज रफ़्तार ब्रेजा कार की टक्कर से बाइक सवार मां-बेटे की मौके पर ही मौत के बाद प्रयागराज-प्रतापगढ़ हाईवे पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। घटना के बाद राहगीरों एवं ग्रामीणों की भीड़ जुट गई।
सूचना पाकर मौके पर रामफल इनारी पुलिस चौकी इंचार्ज दिनेश मिश्रा के साथ मऊआइमा की पुलिस मौके पर पहुंची और घायल महिला को उपचार के लिए पीएचसी मऊआइमा ले जाया गया। डाक्टरों ने हालत चिंताजनक देख शहर रिफर कर दिया। उधर पुलिस ने हादसे में मृत मां-पुत्र के शव का कब्जे में लेते हुए पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। घटना के बाद घायल मनोरमा के पति राजेंद्र की तहरीर पर पुलिस ने कार नंबर तथा चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की है।
मां-बेटे की लाश देख परिजनों में हाहाकार
मऊआइमा। सुधा तथा उसके पुत्र गुलशन की मौत एवं चाची के घायल होने की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। दोनों की लाशें देखकर ऐसा कोई भी नहीं था जिसकी आंख न भर आई हो। गुलशन के पिता को सांत्वना देने वाले भी रो रहे थे।
-प्रयागराज-प्रतापगढ हाईवे मार्ग का कार्य चल रहा है। हाईवे मार्ग पर ही मिट्टी, बालू, गिट्टी को सड़क पर ही गिरा दिया जाता है। जिससे आए दिन हाईवे पर हादसे हो रहे हैं। कई बार कार्यदायी संस्था के अधिकारियों को अवगत भी कराया गया, लेकिन नतीजा शून्य रहा। जिसको लेकर राहगीरों के साथ ग्रामीणों में हाईवे के जिम्मेदार अधिकारियों के प्रति खासा रोष दिखा।