पूछताछ में उसने अपना नाम मुशीर अहमद निवासी करामात की चौकी बताया। उसने बताया कि यह सभी जाली मार्कशीट हैं जो करामात की चौकी में ही किराए के कमरे में रहने वाले शकील अहमद सिद्दीकी के घर बनाई गई हैं। इस जानकारी पर पुलिस ने दबिश देकर शकील निवासी बख्शीमोढ़ा को भी गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में बताया कि स्कैनिंग व फोटोशॉप सॉफ्टवेयर के जरिए वह पिछले दो वर्षों से जाली मार्कशीट व सर्टिफिकेट बनाने का गोरखधंधा कर रहा था। पुलिस ने मौके से लैपटॉप, कंप्यूटर, प्रिंटर समेत अन्य डिवाइस व कई जाली मार्कशीट व प्रमाणपत्र कब्जे में ले लिए। शुक्रवार को दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया।
तीन से चार हजार में देते थे जाली मार्कशीट
एसटीएफ के मुताबिक, पूछताछ में आरोपी शकील ने बताया कि वह तीन से चार हजार में जाली मार्कशीट व प्रमाणपत्र उपलब्ध कराते थे। जिसमें से 1000 से 1500 रुपये उसे जबकि दो-ढाई हजार रुपये तक मुशीर को मिलते थे। अफसरों ने बताया कि आरोपी मुशीर उसके कब्जे से मिली मोटरसाइकिल से संबंधित दस्तावेज भी नहीं दिखा पाया, जिस पर उसे थाने लाकर सील कर दिया गया।