अजगर से छेड़छाड़ किसी के लिए भी भारी पड़ सकता है। अब तक शहर में निकले अजगरों की लंबाई छह से आठ फीट तक रही है। इनकी उम्र पांच से सात वर्ष तक आंकी गई है। इस उम्र तक ये अजगर शिकार करने लायक हो जाते हैं।
वे किसी भी बकरी, बछिया जैसे छोटे जानवरों को पहले मुंह से फंसाते हैं और पिर धीरे-धीरे पूंछ से कसाव बढ़ाते हैं। इसके बाद वे धीरे-धीरे लार्वा छोड़ना शुरू करते हैं, जिससे शिकार का दम निकल जाता है। छोटे बच्चों के लिए ये अजगर बहुत खतरनाक होते हैं।
वन विभाग ने पिछले गंगा-यमुना के कछारी इलाकों में बस्तियों तक पहुंचे वाले 14 अजगर पकड़े थे। इनमें से छह तो राजकीय होम्योपैथिक कॉलेज परिसर के ही वन विभाग ने पिंजड़ों में बंद किए थे। सभी अजगर मेजा, कोरांव और शंकरगढ़ के जंगलों में छोड़े गए थे। इस बार वन विभाग में बस्तियों से छह अजगर पकड़े जा चुके हैं।
इनमें एक दो फीट के बच्चे अजगर भी शामिल थे। तेलियरगंज इलाके में बुधवार को पकड़े गए अजगर को वन विभाग के कर्मचारियों ने गुरुवार को कोरांव के जंगल में ले जाकर छोड़ा। बारिश के दौरान कछार से निकल कर बस्तियों तक पहुंचे अजगरों को पकड़ने के लिए रेंजर के नेतृत्व में टीम बनाई गई है। कहीं अजगर दिखे तो इसकी सूचना वन विभाग को दी जा सकती है। त्वरित कार्रवाई की जाएगी।