Prayagraj, the city of Porus of Muqaddar: Mamta Kalia
प्रयागराज। साझी संस्कृति के लिए ही यह शहर हमेशा से जाना जाता रहा है। साहित्य की यहां समृद्ध परंपरा रही है। वैसे भी यह मुकद्दर के सिकंदर का नहीं, मुकद्दर के पोरस का शहर है। मंगलवार को प्रो ओपी मालवीय की प्रथम पुण्यतिथि पर सरोकार संस्था की ओर से आयोजित ‘इलाहाबाद की साझी संस्कृति और साहित्यिक वैभव’ विषयक परिचर्चा में यह बातें कथाकार ममता कालिया ने कही। यह कार्यक्रम जगत तारन गोल्डन जुबली स्कूल के रवींद्रालय सभागार में किया गया।
ममता कालिया ने कहा कि साझी संस्कृति समय की जरूरत है। इसे समझना और अमल में लाया जाना चाहिए। उन्होंने इस शहर में साहित्यकारों की लंबी शृंखला पर भी चर्चा की। पंत, निराला और महादेवी से लेकर रवींद्र कालिया, अमरकांत, दूधनाथ सिंह, शैलेश मतियानी तक का उन्होंने जिक्र किया। नए लेखकों और कवियों में प्रो अनीता गोपेश, यश मालवीय और अंशु मालवीय का उन्होंने नाम लिया। साथ ही साहित्य के प्रति नई पीढ़ी के घटते रुझान पर उन्होंने अफसोस जताया। कहा कि नई पीढ़ी कम पढ़ रही है, जबकि उनके दौर में पढ़ने के लिए प्रतिस्पर्धा लगी रहती थी।
उन्होंने कहा कि साहित्य की इस समृद्ध परंपरा के कारण ही इलाहाबाद जैसा वैभव कोई और शहर नहीं पा सका। महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय विश्विद्यालय के पूर्व कुलपति विभूति नारायण राय ने प्रो मालवीय से जुड़ी स्मृतियों को साझा किया। बताया कि अगर प्रो मालवीय उनको तीन महीना अपने घर में रखकर मर्गदर्शन ना करते तो उनका आईपीएस होना संभव ना हो पाता। अध्यक्षता कर रहे पद्मश्री शमसुर्रहमान फारूकी ने बताया कि उनके के दोस्त प्रो मालवीय ने हर उस चीज को अपनाया जिसमें अच्छाई दिखाई दी।
इससे पहले शुभारंभ रघुपति सहाय फिराक की गजलों के साथ हुआ। डॉ अंकिता चतुर्वेदी के निर्देशन में जगत तारण डिग्री कॉलेज की छात्राओं व संकर्ष चतुर्वेदी ने गजलों की प्रस्तुति की। अतिथियों का स्वागत आनंद मालवीय ने किया। संचालन कवि यश मालवीय ने किया। धन्यवाद जताया उत्कर्ष मालवीय ने। इस मौके पर प्रो एए फातमी, प्रो अनिता गोपेश, अधिवक्ता रवि किरण जैन समेत तमाम लोग उपस्थित थे।