सरायइनायत थाना क्षेत्र के जैतपुर रेलवे क्रासिंग के बगल रामनाथपुर रेलवे स्टेशन पर बुुधवार की सुबह सुनील कुमार शव मिलने से हड़कंप मच गया। शरीर पर चोट के कई निशान थे। तीन दिन पहले ही सुनील का विवाह हुआ था। परिजनों ने हत्या की आशंका जताई थी। हालांकि बाद में जीआरपी को लिखकर दिया कि ट्रेन की चपेट में आने से उसकी मौत हो गई। सुनील की मौत से परिजनों में कोहराम मचा रहा।
सरायइनायत थाना क्षेत्र के जैतपुर रेलवे क्रॉसिंग के बगल रामनाथपुर रेलवे स्टेशन के पूर्वी सिग्नल के पास बुधवार की सुबह रेलवे ट्रैक के किनारे एक युवक की लाश पाई गई। उसके शरीर पर चोट के कई निशान थे। मामला जीआरपी के अंतर्गत होने के कारण युवक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। पुलिस और जीआरपी युवक के शव की शिनाख्त में जुटी हुई थी। तभी युवक के परिजन रोते-बिलखते मौके पर पहुंचे। शव की शिनाख्त सुनील कुमार (27) पुत्र हीरालाल निवासी फतूहां के रूप हुई। सुनील की शादी 13 जून को गुंजा पुत्री गुलाब निवासी बालक सराय इस्माइल, उतरांव के साथ हुई थी। परिजनों ने पुलिस को बताया कि मंगलवार की रात तकरीबन आठ बजे सुनील घर से निकला था। उसके शरीर पर चोट के कई निशान देख परिजनों ने उसकी हत्या की आशंका जताई थी। हालांकि बाद में लिखकर दिया कि ट्रेन की चपेट में आने से सुनील की मौत हो गई।
विवाह के दूसरे दिन तबियत हुई थी खराब, ले गए थे तांत्रिक के पास
सुनील और गुंजा की 13 जन को शादी हुई थी। 14 जून को सुनील ऊटपटांग हरकतें करने लगा। हरकतों से लग रहा था कि उसकी दिमागी हालत ठीक नहीं है। 15 जून को जब उसकी हालत ज्यादा खराब हुई तो परिजन उसे हंडिया के एक तांत्रिक के पास लेकर गए। वहां पर भी सुनील को कोई आराम नहीं मिला। सुनील के ससुर गुलाब को पता चला तो वह उसे लेकर दूसरे तांत्रिक के पास गए। लेकिन उसकी तबियत लगातार खराब हो रही थी। दोपहर में परिजन उसे लेकर घर चले आए थे। इसी बीच देर शाम को सुनील गांव के दो लोगों के साथ घूमने के लिए फतूहां बाजार गया था पर लौटकर नहीं आया। रातभर परिजन उसकी तलाश करते रहे। सुबह मौत की सूचना मिली तो कोहराम मच गया। सुनील दो बहनों के बीच एकलौता भाई था। सुनील पिता हीरालाल के साथ मजदूरी करता था। उसके मां का देहांत हो चुका है। दोनों बहनों की भी शादी हो चुकी है।
हाथों की मेंहदी छूटने से पहले उजड़ा सुहाग
अभी तीन दिन पहले की ही तो बात है। पूरे धूमधाम और गाजेबाजे के साथ सुनील बारात लेकर गुंजा के घर पहुंचा था। दोनों घरों में खुशियों का माहौल था। अभी तो गुंजा के हाथों की मेंहदी भी नहीं छूटी थी कि उसका सुहाग उजड़ गया। पति के मौत की खबर गुंजा को उसके मायके में मिली तो वह बेसुध होकर गिर पड़ी। परिवार की महिलाएं लगातार उसे संभालने में लगी हुई थीं। गांव की बस्ती में मातम छाया हुआ था।