हर किसी के मन की बात कहकर करीब पहुंचने का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चिर परिचित अंदाज संगमनगरी में भी दिखा। उन्होंने जब ठेठ इलाहाबादी बोली में अपना संबोधन आरंभ किया, तब तालियों की गड़गड़ाहट के साथ मोदी-मोदी के शोर से परेड मैदान गूंज उठा।
हर किसी के मन की बात कहकर करीब पहुंचने का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चिर परिचित अंदाज संगमनगरी में भी दिखा। उन्होंने जब ठेठ इलाहाबादी बोली में अपना संबोधन आरंभ किया, तब तालियों की गड़गड़ाहट के साथ मोदी-मोदी के शोर से परेड मैदान गूंज उठा।
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मातृशक्ति के महाकुंभ में प्रधानमंत्री मोदी ने सामर्थ्य की प्रतीक माताओं-बहनों को सबसे पहले नमन किया। इसके बाद भारत माता की जय करते हुए उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत इलाहाबादी बोली में कर लोगों का दिल जीत लिया। मोदी ने ठेठ अंदाज में भीड़ का अभिवादन किया। कहा कि, संगम पर ये धरती के हम शीश झुकाय के प्रणाम कर थई। ई धरा पर ज्ञान, धर्म और न्याय क त्रिवेणी बहत हौ। तीर्थन के ई नगरी में आय के अपार ऊर्जा क एहसास होत बा।
मोदी ने पिछले कुंभ की यादों तो ताजा करते हुए कहा कि, पिछले कुंभ मा जब हम आवा रहेन तब संगम मा डुबकी लगाइके अलौकिक अनुभव प्राप्त किया रहे। मां गंगा, यमुना, सरस्वती के पावन तट पर बसे प्रयागराज के धरती पर आय के हमेशइ एक अलग ऊर्जा क एहसास होत अहै। ऐसी पावन भूमि को हाथ जोड़कर प्रणाम करता हूं। मोदी के इस संबोधन पर हर तरफ भारत माता और वंदे मातरम के भी जयकारे लगते रहे। इससे पहले मोदी ने स्वयं सहायता समूहों की 75 महिलाओं से मुलाकात की और उनसे आत्मीय संवाद किया।