दस दिवसीय राष्ट्रीय शिल्प मेले में महिला कथा गायन, बांसुरी वादन एवं देशज लोकनृत्यों की प्रस्तुतियां
प्रयागराज। सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित राष्ट्रीय शिल्प मेले के तहत शनिवार को भरथरी, पांडवानी, चनैनी व आल्हा गायन की चार प्राचीन शैलियों पर आधारित गायन की प्रस्तुतियां एक साथ जीवंत हुईं। मुक्ताकाशी मंच पर रायबरेली की शीलू सिंह की ओर से जगनिक रचित आल्हा खण्ड के माड़ौगढ़ की लड़ाई, मीना साहू ने पांडवों की जीवनगाथा को बखूबी प्रस्तुत किया।
पांडवानी गायिका मीना साहू ने ‘सावन बिना बिजली ना चमकै-भादौ बिन बरखा ना बरसे’ के गायन से द्रौपदी चीरहरण का प्रसंग प्रस्तुत कर दर्शकों की तालियां बटोरीं। छत्तीसग़ढ़ की रेखा निषाद ने ‘सात बैरी सतखण्डा ए-सोरा खण्डा के वो’ का गायन तथा लोरिक व चंदा की प्रेम कहानी पर आधारित चनैनी गायन खूब सराहा गया। बांसुरी वादक पंडित हरि प्रसाद चौरसिया की शिष्या देवोप्रिया एवं सुचिस्मिता ने रागों, छंदों व भावों के गुंफन को बांस की बांसुरी से अद्भुत तरीके से प्रस्तुत किया।
वहीं सांस्कृतिक संध्या के पूर्व ‘पैगामें मोहब्बत’ के तहत आयोजित कवि सम्मेलन एवं मुशायरे में डॉ.नायाब बलियावी, डॉ. श्लेष गौतम, ताजवर सुल्ताना, प्रीता बाजपेयी, तरन्नुम नाज़, इरफान रिजवी, अमन जैदी ने रचनापाठ किया। अध्यक्षता कमरुल हसन सिद्दीकी और संचालन नज़ीब इलाहाबादी ने किया।
शिल्प मेले में आज
शिल्प मेले के तहत रविवार को गुरुनानक देव जी की 550वीं जयन्ती के उपलक्ष्य में शबद गायन की भावपूर्ण प्रस्तुति की जाएगी जिसमें शहर के सभी गुरुद्वारों की सहभागिता होगी। इसी के साथ महिला कथा गायन की विविध शैलियों के साथ लोककला गायन एवं लोकनृत्य की प्रस्तुतियां होंगी।