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प्रयागराज: अब सपेरों नहीं, सिलिकॉन वैली का देश है भारत- कुलपति

Sun, 03 Mar 2019 01:10 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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राष्ट्रवाद भारत के लिए प्राणवायु है। हम राष्ट्र को एक भौगोलिक नहीं, बल्कि जीवंत इकाई मानते हैं। यह बात भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव पी. मुरलीधर राव ने शनिवार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय के एसएन घोष सभागार में आयोजित संगोष्ठी में कही। ‘राष्ट्रवाद और न्यू इंडिया’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में पी. मुरलीधर राव ने 1897 में चेन्नई में स्वामी विवेकानंद के दिए भाषण की व्याख्या करते हुए कहा कि हिंदुस्तान के लोगों को सभी देवताओं को छोड़कर केवल भारत माता की आराधना करनी चाहिए। राष्ट्रवाद देश की स्वाभाविक अभिव्यक्ति है। भारत का राष्ट्रवाद भाषा एवं धर्म के दायरों में जकड़ा हुआ नहीं है। एक धर्म और एक भाषा के आधार पर यूरोप में राष्ट्र का निर्माण हुआ लेकिन हिंदुस्तान ने राष्ट्रवाद के पश्चिमी मॉडल को ठुकरा दिया।

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उन्होंने मार्क्सवाद एवं राष्ट्रवाद के संबंधों पर भी प्रकाश डाला। पूर्व मंत्री डॉ. नरेंद्र कुमार सिंह गौर ने कहा कि राष्ट्रवाद हमारे के लिए स्वाभिमान और आत्म सम्मान का प्रतीक है। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. रतनलाल हांगलू ने कहा कि यूरोप में राष्ट्रवाद एक राजनैतिक प्रतीक है जबकि भारत में राष्ट्रवाद भावनात्मक प्रतीक है। 30 साल पहले भारत सपेरों का देश कहा जाता था लेकिन आज सिलिकॉन वैली का देश बन चुका है। अतिथियों का स्वागत प्रो. जगदंबा सिंह, संचालन डॉ. रंजना त्रिपाठी एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. निरंजन सिंह ने किया। इस मौके पर प्रो. रामेंद्र सिंह, प्रो. जे अंसारी, प्रो. शशिकांत राय, प्रो. हर्ष कुमार, प्रो. एनके शुक्ला, डॉ. चितरंजन कुमार आदि मौजूद रहे।

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