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उपलब्धि : प्रयागराज के धावक अनिल कुमार ने बांग्लादेश में लहराया परचम, ढाका मैराथन में हासिल किया दूसरा स्थान

Fri, 20 Jan 2023 10:51 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

अनिल कुमार ने शुक्रवार को बांग्लादेश में आयोजित हुई बांगबंधु शेख मुजीब ढाका मैराथन-2023 मेें दूसरा स्थान हासिल किया है। बांग्लादेश एथलेटिक्स फेडरेशन की ओर से आयोजित हुई इस प्रतियोगिता में अनिल कुमार ने पहली बार क्वालीफाई किया था।
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अनिल कुमार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हजार बर्क गिरें, लाख आंधियां उठें, वो फूल खिल के रहेंगे जो खिलने वाले हैं। कुछ ऐसा ही टैलेंट के बारे में भी कहा जा सकता है। यही टैलेंट प्रयागराज के झूंसी स्थित हनुमानगंज के रहने वाले धावक अनिल कुमार में भी है। हाल ही में नवंबर महीने में प्रयागराज में आयोजित हुई इंदिरा मैराथन-2022 में तीसरे स्थान पर रहने वाले अनिल कुमार ने एक और उपलब्धि हासिल की है।

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अनिल कुमार ने शुक्रवार को बांग्लादेश में आयोजित हुई बांगबंधु शेख मुजीब ढाका मैराथन-2023 मेें दूसरा स्थान हासिल किया है। बांग्लादेश एथलेटिक्स फेडरेशन की ओर से आयोजित हुई इस प्रतियोगिता में अनिल कुमार ने पहली बार क्वालीफाई किया था।

मैराथन में पहले स्थान पर भारत के ही बांगरिया विक्रम भरत सिंह रहे, जिन्होंने दो घंटे 18 मिनट और 28 सेकेंड में अपनी 42.195 किलोमीटर की दौड़ पूरी की। प्रयागराज के अनिल कुमार सिंह ने दो घंटे 20 मिनट और 30 सेकेंड में दौड़ पूरी करके दूसरा स्थान हासिल किया। जबकि इंदिरा मैराथन-2022 में पहले स्थान पर रहने वाले शेर सिंह इस प्रतियोगिता में तीसरे स्थान पर रहे।

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उन्होंने अपनी दौड़ दो घंटे 20 मिनट और 35 सेकेंड में पूरी की। महज पांच सेकेंड से वह दूसरा स्थान हासिल करने से चूक गए। वहीं इस मैराथन में चौथे स्थान पर नेपाल के संतोष बिक्रम बिष्ट रहे, जिन्होंने दो घंटे 24 मिनट और 03 सेकेंड पर दौड़ पूरी की। पांचवे स्थान पर श्रीलंका के धावक सिसिरा कुमारा वानिक्या मुदियांसेलेग रहे। सिसिरा ने अपनी दौड़ दो घंटे 24 मिनट और 48 सेकेंड में अपनी दौड़ पूरी की।

एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से इस मैराथन में कुल 20 धावक बांग्लादेश पहुंचे थे, जिनमें पहले तीन स्थानों पर भारत के ही धावकों ने बाजी मारी। प्रयागराज के अनिल कुमार इस बार के इंदिरा मैराथन में तीसरे स्थान पर रहे थे, जबकि वर्ष 2017 और वर्ष 2021 के इंदिरा मैराथन में अनिल कुमार ने दूसरा स्थान हासिल किया था। वर्ष 2017 के इंदिरा मैराथन में अनिल कुमार महज चार सेकेंड के अंतर से विजेता बनने से चूक गए थे।

अनिल कुमार ने बांग्लादेश में हुए इस मैराथन में दूसरा स्थान हासिल करने के बाद अमर उजाला से फोन पर बातचीत करते हुए बताया कि उन्होंने तीन महीने से इस मैराथन के लिए जमकर तैयारी की थी। वह इस मैराथन में दूसरा स्थान हासिल करने के बाद बेहद खुश हैं और इसे अपनी ओलंपिक की तैयारी के रूप में देख रहे हैं। अनिल ने कहा कि तकरीबन दो मिनट के अंतर से वह विजेता बनने से जरूर चूके हैं, लेकिन उनका हौसला और मजबूत हो गया है।

सेना में हवलदार के पद पर जम्मू में तैनात अनिल कुमार को दौड़ने का शौक स्कूली दिनों से ही लग गया था। वह आर्मी में नौकरी चाहते थे और इसी उद्देश्य के साथ दौड़ते थे। पिता के देहांत होने और बड़े भाई पर परिवार कि पूरी जिम्मेदारी देखी तो जल्द से जल्द नौकरी की चाह थी। दौड़ते हुए पहली बार वर्ष 2014 में यूनिवर्सिटी गेम्स में प्रतिभाग किया और पहली ही बार में तीसरा स्थान प्राप्त किया। यहीं से आत्मविश्वास बढ़ा और अन्य प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करने लगा।
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अनिल ने बताया कि उनका सपना ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने का और भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतने का है। वह इस साल जुलाई-अगस्त में होने वाली एशिया मैराथन के लिए क्वालीफाई करना चाहते हैं, इसके लिए वह हर रोज 50 किलोमीटर की दौड़ लगा रहे हैं।

साथ ही ओलंपिक का हिस्सा बनने के लिए पुणे स्थित आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट में कोच सुबेदार केसी रामु की देखरेख में अपनी तैयारी कर रहे हैं। वहीं अनिल की मां रवीना देवी ने कहा कि उनके बेटे ने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर यह उपलब्धि हासिल की है। वह बचपन से ही तेज दौड़ने और लोगों को हराने का शौक रखता था, अब मेरी यही कामना है कि मेरा बेटा भारत के लिए ओलंपिक में पदक जीते। संवाद
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