मारपीट, तोड़फोड़ के मामले में नामजद आरोपी की जगह इफको कर्मचारी को उठाकर लाने वाली सिविल लाइंस पुलिस को बैकफुट पर आना पड़ा। सोमवार सुबह वादी के बयान के बाद उसने हिरासत में लिए गए कर्मचारी को छोड़ दिया। हालांकि पुलिस की इस कार्रवाई से भुक्तभोगी के परिचितों में नाराजगी भी रही।
30 सितंबर को सिविल लाइंस स्थित बाइक शोरूम में तोड़फोड़, मारपीट के मामले में आदेश कुमार सिंह ने ऋत्विक यादव, संदीप यादव, विनोद यादव पता अज्ञात को नामजद किया था। रविवार रात सिविल लाइंस पुलिस अल्लापुर पहंची और आरोपी ऋत्विक के पिता विनोद यादव को थाने उठा लाई। वह इफको में कर्मचारी हैं। विनोद के मुताबिक, बार-बार यह बताने पर भी कि मुकदमे में नामजद विनोद कोई और है, पुलिस ने उनकी एक नहीं सुनी और उन्हें जीप में भरकर थाने लाई। आरोप है कि पुलिस ने रात भर उन्हेें थाने में बैठाए रखा। सुबह वादी ने थाने पहुंचकर बताया कि मुकदमे में नामजद विनोद कोई और है तो पुलिस बैकफुट पर आ गई। उधर सुबह विनोद के परिचित अधिवक्ताओं ने भी थाने पहुंचकर नाराजगी जताई जिसके बाद उन्हें थाने से छोड़ा गया। मामले में पुलिस ने बताया कि वादी के सामने तस्दीक कराई गई। जिसमें उसने बताया कि मारपीट तोड़फोड़ में शामिल विनोद कोई और था। जिसके बाद हिरासत में लिए गए विनोद को छोड़ दिया गया।