सिर्फ नौ हाल खुले
कोविड संक्रमण खतरा होने के बाद स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने लगी थी। इसके बावजूद 12 में से नौ हाल ही खुले। सहायक मनोरंजन कर अधिकारी के अनुसार पिछले सप्ताह एक और संचालक ने हाल खोलने की अनुमति मांगी थी लेकिन नए वैरिएंट के खतरे को देखते हुए वह अब पीछे हट गए हैं।
... गांवों में फिर हो सकता है ऑक्सीजन का गंभीर संकट
कोविड के नए वैरिएंट को लेकर एलर्ट जारी कर दिया गया है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से सभी तरह की तैयारी के दावे किए जा रहे हैं लेकिन हालात बिगड़े तो ऑक्सीजन की कमी एक बार फिर खतरनाक रूप अख्तियार कर सकती है। ऑक्सीजन को लेकर प्रशासन की पूरी तैयारी सिर्फ शहर तक सीमित है। जिले के कुल 23 में सामुदायिक केंद्रों में से सिर्फ फूलपुर में ही ऑक्सीजन प्लांट चालू हो सका है। 18 केंद्रों में प्लांट लगाने का प्रस्ताव ही वापस हो गया है।
कोविड की दूसरी लहर के दौरान 1087 लोगों ने जान गवां दी। यह सरकारी आंकड़ा है। वास्तविक संख्या कहीं अधिक बताई जा रही है। इनमें से सैकड़ों लोगों ने ऑक्सीजन की कमी की वजह से जान गवां दी। ग्रामीण क्षेत्रों में ऑक्सीजन की कमी का गंभीर संकट रहा और लोग अस्पताल भी नहीं पहुंच सके।
इसके मद्देनजर स्वरूपरानी तथा जिला स्तरीय अन्य अस्पतालों के अलावा 21 सामुदायिक केंद्र परिसर में भी ऑक्सीजन प्लांट लगाने का निर्णय लिया गया था। ताकि, सामुदायिक केंद्र पर ही कोविड संक्रमित या अन्य मरीज को प्रारंभिक चिकित्सा मिल सके। साथ ही ऑक्सीजन सिलेंडर लगाकर मरीज को कोविड अस्पताल तक पहुंचाया जा सके। इस कवायद के तहत स्वरूपरानी, बेली, डफरिन और टीबी हॉस्पिटल में नए ऑक्सीजन प्लांट चालू कर दिए गए हैं।
नैनी स्थित सरस्वती हाईटेक सिटी में भी प्लांट चालू हो गया है। इसके विपरीत ग्रामीण क्षेत्रों में सिर्फ तीन सामुदायिक केंद्रों पर प्लांट लगाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकी। तीन सामुदायिक केंद्रों में से फूलपुर का प्लांट चालू हो गया है लेकिन कोटवां और भगवतपुर के प्लांट अभी निर्माण की स्थिति में हैं। अन्य 18 सामुदायिक केंद्रों पर प्लांट लगाने का प्रस्ताव ही वापस हो गया है। हालांकि सीएमओ डॉ. नानक सरन का कहना है कि सभी अस्पतालों में एलर्ट जारी कर दिया गया है। ऑक्सीजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं होगी।