कोई नेतृत्व नहीं, सबकुछ स्वत:स्फूर्त
0 जगह-जगह दिखे विपक्षी दलों के नेता लेकिन आंदोलन का हिस्सा बनने के बजाय एक तरफ रहे खड़े
प्रयागराज। एनआरसी और सीएए के विरोध में शुक्रवार को बड़ा आंदोलन हुआ। इसमें हजारों लोग एकत्रित हुए लेकिन कोई नेता नहीं था। किसी की तरफ से कोई घोषणा नहीं की गई थी और न ही अपील थी। सभी खुद अपना नेतृत्व कर रहे थे। एक के पीछे एक सभी चले जा रहे थे। सुभाष चौराहा, जामा मस्जिद आदि स्थानों पर विपक्षी दलों के नेता मौजूद जरूर रहे लेकिन आंदोलन का हिस्सा बनने के बजाय एक तरफ खड़े रहे। गौर करने वाली बात यह रही कि आंदोलनकारियों में से उन नेताओं को पहचानने वालों की संख्या भी गिनती की रही।
पूरे जिले में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई। सुभाष चौराहा के अलावा जामा मस्जिद, अटाला, अतुरसुइया, नक्खास कोहना, शाहगंज आदि स्थानों पर भारी फोर्स तैनात रही। अफसरों की अलग-अलग टीम धर्मगुरुओं, नेताओं तथा प्रमुख लोगों के संपर्क में रही। उनसे धरना-प्रदर्शन में शामिल न होने की अपील के साथ हिदायत भी दी गई थी। शुक्रवार की सुबह क्षेत्र के प्रमुख लोगों की अगुवाई में फोर्स ने परेड भी निकाली। इसका असर यह जरूर हुआ कि आंदोलन की अगुवाई के लिए वे आगे तो नहीं आए लेकिन उनकी अपील लोगों की नाराजगी को नहीं रोक पाई। नेतृत्व के अभाव में जामा मस्जिद पर जुलूस की अगुवाई को लेकर शुरू में कुछ हिचकिचाहट जरूर दिखाई दी लेकिन एक बार लोग जुटे तो भीड़ बढ़ती ही गई। जगह-जगह से छोटा-छोटा समूह जुलूस का हिस्सा बनता गया। जामा मस्जिद पर सपा और कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे लेकिन वे कोतवाली की तरफ खड़े रहे। इसी तरह से सुभाष चौराहा पर सपा और कांग्रेस के अलावा वामपंथी नेता भी मौजूद रहे लेकिन सभी फोर्स के साथ एक तरफ ही रहे। भीड़ ने भी इन नेताओं की तरफ ध्यान नहीं दिया और हर आंदोलनकारी अपना नेतृत्व खुद कर रहा था।
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अफसरों ने सुबह ही संभाल ली कमान
0 प्रशासनिक अफसरों और पुलिस महकमा के लिए दो दिन काफी थकाने वाले रहे। शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद बड़े आंदोलन की पहले से आशंका थी। बृहस्पतिवार को सुभाष चौराहे पर जुटी भीड़ ने इसका मजबूत आधार भी रख दिया था। इसे ध्यान में रखते हुए बृहस्पतिवार देर रात तक अफसर दौड़ते रहे। इसका अनुमान इससे ही लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री की वीडियो कांफ्रेंसिंग के बाद रात 11 बजे तक एडीजी, मंडलायुक्त तथा अन्य अफसर कलक्ट्रेट में मौजूद रहे तथा शांति व्यवस्था बनाए रखने की योजना बनाते रहे। इसके बाद करीब 12 बजे डीएम और एसएसपी ने अन्य अफसरों की बैठक ली और आवश्यक निर्देश दिए। इसके बाद अफसरों ने अपने-अपने क्षेत्र में कमान संभाल ली और रात में ही क्षेत्र के प्रभावी लोगों से मुलाकात की। साथ ही संदिग्ध लोगों पर भी नजर रही। इसके अगले दिन सुबह आठ बजे तक डीएम, एसएसपी समेत सभी अफसर भ्रमण पर निकल गए थे। मंडलायुक्त भी पुराने शहर में लगातार भ्रमण करते रहे तथा करीब साढे़ 12 बजे वह चौक में मौजूद रहे। इसके बाद तो पूरा नजारा ही बदल गया और अफसराें के सामने यही चुनौती रही कि किसी तरह की अनहोनी न होने पाए। दूसरे शहरों की आगजनी की सूचना से धड़कने और बढ़ गईं थीं लेकिन यहां सबकुछ नियंत्रण में रहा।
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सन्नाटा कह रहा था आंदोलन की कहानी
प्रयागराज। बृहस्पतिवार को हजारों की भीड़ तथा अगले दिन सुबह के सन्नाटा के साथ ही बड़े आंदोलन की पटकथा तैयार हो गई थी। किसी संस्था ने बंद की अपील नहीं की थी लेकिन पुराने शहर में दुकानें बंद रहीं। चौक, खुल्दाबाद, रोशनबाग, मिर्जा गालिब रोड, नुरूल्ला रोड, मीना बाजार आदि स्थानों पर दुकानें बंद थीं। एक-दो दुकानें खुलीं भी तो आधी-अधूरी। सड़कों पर अपेक्षाकृत कम लोग दिखे। इस सन्नाटे की वजह कोई नहीं बता पाता। चौक में कपड़ा व्यवसायी रामकुमार का कहना था, किसी ने बंद की अपील नहीं की है लेकिन दुकानें बंद हैं। कुछ व्यापारी सुबह दुकान खोलने के आए थे लेकिन माहौल देखकर वे भी वापस हो गए। मीना बाजार के असलम, जावेद का भी यही कहना था। इनकी इस टिप्पणी में यह आशंका भी शामिल थी कि यह खामोशी किसी बड़े तुफान का संकेत दे रही है।
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लोगों के अधिकारों का हनन कर रही सरकार
0 धारा 144 लागू करने, धरना-प्रदर्शन पर रोक तथा इंटरनेट सेवा बाधित करने पर राजनीतिक दलों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भाकपा (माले) न्यू डेमोक्रेसी के प्रदेश सचिव डॉ.आशीष मित्तल का कहना है कि राजनीतिक अभिव्यक्ति रोकने के लिए सरकार का यह कदम गलत है। उन्होंने एनआरसी और सीएए के मिले जुले प्रभाव को काफी खतरनाक बताया और दोनों ही प्रावधानों को वापस लिए जाने की मांग की। समाजवादी पार्टी के नेताओं ने भी इंटरनेट सेवा बाधित करने की निंदा की। पूर्व प्रदेश सचिव नरेंद्र सिंह, दान बहादुर मधुर आदि नेताओं का कहना है कि शहर में अघोषित कर्फ्यू जैसा माहौल रहा। नेताओं ने शहर में भ्रमण लोगों से शांति बनाए रखने की भी अपील की। इस दौरान संतलाल वर्मा, दिनेश यादव, अशोक सिंह, कुशल सिंह, आरएन आदि मौजूद रहे।