इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) प्रशासन ने महिला मेडिकल अफसर डॉ. साधना पांडेय को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। उनकी ड्यूटी महिला छात्रावास परिसर में लगी थी। आरोप है कि वह नियमित रूप से हॉस्टल नहीं आ रहीं थीं और बुलाने पर भी छात्राओं के इलाज के लिए नहीं आती थीं।
वहीं, चर्चा यह भी है कि महिला मेडिकल अफसर ने पीपीई किट की मांग की थी, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। इविवि के रजिस्ट्रार प्रो. एनके शुक्ला ने डीएसडब्ल्यू की सिफारिश और कुलपति के आदेश पर मेडिकल अफसर की बर्खास्तगी से संबंधित पत्र जारी कर दिया है।
डॉ. साधना पांडेय को संविदा पर महिला मेडिकल अफसर के पद नियुक्त किया गया था। उनकी ड्यूटी महिला छात्रावास परिसर में लगाई है। लॉक डाउन के दौरान बड़ी संख्या में छात्राएं घर लौट गईं और काफी छात्राएं हॉस्टल में ही रह गईं। डॉ. साधना पांडेय पर आरोप है कि वह नियमित रूप से हॉस्टल नहीं आ रहीं थीं और जब किसी छात्रा की तबीयत बिगडने पर उन्हें फोन किया जाता तो वह कोविड-19 के कारण आने से इनकार कर देतीं।
ऐसे में इविवि प्रशासन को छात्राओं को इलाज के लिए किसी नर्सिंग हो या सरकारी अस्पताल में जाना पड़ रहा था। डीएसडब्ल्यू प्रो. केपी सिंह का कहना है कि छात्राएं हॉस्टल परिसर में आइसोलेट हैं। बाहर इलाज के लिए ले जाने पर उन्हें संक्रमण का खतरा है। छात्राओं के इलाज के लिए ही डॉ. साधना पांडेय को मेडिकल अफसर के पद पर संविदा पर नियुक्त किया गया था लेकिन वह अपनी ड्यूटी नहीं कर रहीं थीं।
छात्राओं के स्वास्थ्य से किसी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। डॉ. पांडेय की सेवा शर्तों में लिखा था कि उन्हें बिना नोटिस के बर्खास्त किया जा सकता है। उनकी सेवाओं से असंतुष्ट होने पर बर्खास्तगी के आदेश जारी कर दिए गए हैं। जल्द ही किसी नए मेडिकल अफसर की नियुक्ति कर दी जाएगी। उधर, इविवि में यह चर्चा भी है कि डॉ. पांडेय कोरोना संक्रमण का खतरा बताते हुए हॉस्टल परिसर में आने के लिए इविवि प्रशासन से पीपीई किट की मांग रहीं थी।