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Prayagraj News : एक साल में दो चिकित्सकों की संदिग्ध हालात में मौत, चौंकाने वाली समानताएं

Wed, 08 Apr 2026 04:37 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

मोतीलाल नेहरू (एमएलएन) मेडिकल कॉलेज में तैनात डॉक्टर की संदिग्ध हालात में मौत ने एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रविवार देर रात जूनियर रेजिडेंट डॉ. आदित्य की मौत से करीब नौ महीने पहले एसआरएन अस्पताल में तैनात उत्तराखंड के कोटद्वार निवासी हड्डी रोग विभाग के डॉ. कार्तिकेय श्रीवास्तव की भी संदिग्ध हालात में मौत हुई थी।
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डॉ. आदित्य, जूनियर सर्जन, एसआरएन अस्पताल प्रयागराज। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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मोतीलाल नेहरू (एमएलएन) मेडिकल कॉलेज में तैनात डॉक्टर की संदिग्ध हालात में मौत ने एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रविवार देर रात जूनियर रेजिडेंट डॉ. आदित्य की मौत से करीब नौ महीने पहले एसआरएन अस्पताल में तैनात उत्तराखंड के कोटद्वार निवासी हड्डी रोग विभाग के डॉ. कार्तिकेय श्रीवास्तव की भी संदिग्ध हालात में मौत हुई थी। दोनों मामलों में कई चौंकाने वाली समानताएं सामने आई हैं।

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डॉ. आदित्य जहां जॉर्जटाउन स्थित महिला मित्र के फ्लैट के बाथरूम में बंद मिले तो वहीं डॉक्टर कार्तिकेय एसआरएन अस्पताल परिसर के अंदर पार्किंग में खड़ी कार के अंदर मिले थे। दोनों डॉक्टरों के हाथ में कैनुला लगा हुआ था। अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद एसआरएन उन्हें लाया गया, जहां देर रात तक चले इलाज के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका। दोनों ही मामलों में घटना देर रात की है और शुरुआती तौर पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी है। डॉ. आदित्य की तरह ही डॉ. कार्तिकेय श्रीवास्तव के मामले में भी पोस्टमार्टम से मौत की सटीक वजह स्पष्ट नहीं हो सकी थी। ऐसे में दोनों मामलों में विसरा सुरक्षित कर जांच के लिए भेजा गया।

यह समानता इस बात को और गंभीर बना रही है कि आखिर ऐसी कौन सी परिस्थितियां हैं, जिनमें युवा डॉक्टरों की मौत का कारण तुरंत स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। एसीपी विमल किशोर मिश्रा का कहना है कि प्रकरण में अभी तक परिजनों ने किसी भी प्रकार की तहरीर नहीं दी है। फिर भी कई बिंदुओं पर जांच कराई जा रही है।

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आशंकाएं भी लगभग एक जैसीं

दोनों मामलों में शुरुआती स्तर पर जो संभावनाएं सामने आई हैं, वे भी काफी हद तक मिलती-जुलती हैं। दोनों डॉक्टरों की मौत में दवा या इंजेक्शन के असर के साथ दवा ओवरडोज या अचानक हार्टअटैक की आशंका भी व्यक्त की जा रही है। हालांकि, किसी भी मामले में इन आशंकाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। डॉ. आदित्य के मामले में जिस तरह पुलिस मोबाइल, कॉल डिटेल और घटनास्थल के साक्ष्यों को खंगाल रही है, ठीक उसी तरह डॉ. कार्तिकेय श्रीवास्तव के मामले में भी तकनीकी और मेडिकल एंगल से जांच की गई थी। दोनों मामलों में विसरा सुरक्षित करते हुए फॉरेंसिक रिपोर्ट को सबसे अहम कड़ी माना गया है। 
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परिजनों की चुप्पी, बढ़ता रहस्य

डॉक्टर आदित्य की मौत के बाद से उनके परिजन गहरे सदमे में हैं। हालांकि, अब तक उन्होंने किसी पर कोई आरोप नहीं लगाया है और न ही पुलिस को लिखित तहरीर दी है। पोस्टमार्टम हाउस में मौजूद रहने के बावजूद परिजनों ने मीडिया से दूरी बनाए रखी। उधर, मेडिकल कॉलेज में शोक का माहौल है। सर्जरी विभाग में सन्नाटा पसरा हुआ है। सहकर्मियों के अनुसार आदित्य एक मेधावी और खुशमिजाज डॉक्टर थे। उनकी अचानक मौत से ऑपरेशन थियेटर तक का कामकाज प्रभावित हुआ है। डॉ. आदित्य के परिजनों की तरह ही डॉ. कार्तिकेय के परिवार ने भी तत्काल कोई बड़ा आरोप नहीं लगाया था, जिससे जांच पूरी तरह रिपोर्ट और साक्ष्यों पर निर्भर रही। 

विसरा रिपोर्ट पर टिकीं सभी की निगाहें

फिलहाल, इस पूरे मामले में सबसे अहम कड़ी विसरा रिपोर्ट मानी जा रही है। पुलिस का कहना है कि रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी और जरूरत पड़ने पर केस दर्ज करने या धाराएं बदलने की भी संभावना है। कुल मिलाकर, डॉक्टर आदित्य की मौत फिलहाल एक मेडिकल मिस्ट्री बनी हुई है। शुरुआती जांच में स्पष्ट कारण सामने न आने से रहस्य और गहरा गया है। अब सभी की निगाहें विसरा रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि यह महज हादसा था, लापरवाही या इसके पीछे कोई और वजह छिपी है। 
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