कोविड-19 संक्रमण के कारण देशभर के स्कूल कॉलेज और शिक्षण संस्थाएं 31 जुलाई तक बंद रखने के आदेश के बावजूद नर्सिंग के छात्रों को कोर्स पूरा करने के लिए बाध्य करने के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। हाई कोर्ट ने इस मामले में केंद्र व राज्य सरकार एवं इंडियन नर्सिंग काउंसिल (आईएनसी) से जानकारी मांगी है। याचिका की सुनवाई आठ जुलाई को होगी। कोर्ट ने भारत सरकार व आईएनसी को पक्षकार बना कर नोटिस देने का आदेश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने प्रयागराज नैनी स्थित एक नर्सिंग कॉलेज के छात्र नरेंद्र कुमार सिंह व दो अन्य की याचिका पर दिया है । याचियों का कहना है कि वे नर्सिंग कोर्स कर रहे हैं। केंद्र सरकार के निर्णय के खिलाफ उन्हें कोर्स पूरा करने के लिए बाध्य किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने लॉक डाउन फेज दो में 29 जून 20 को आदेश जारी कर सभी शिक्षण संस्थान 31 जुलाई तक बंद रखने का निर्देश दिया है।
इंडियन नर्सिंग कौंसिल ने भी 14 मई के आदेश से शिक्षा सत्र 2019-20 को सितंबर अक्तूबर 2020 तक बढ़ा दिया है, जो राज्य सरकार पर बाध्यकारी है। इसके बावजूद सरकार नर्सिंग छात्रों को कोर्स पूरा करने के लिए बाध्य कर रही है। जबकि राज्य सरकार का कहना है कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 16 जून 20 के आदेश में कहा है कि कोविड-19 महामारी का सामना करने के लिए नर्सों की जरूरत है।
कोर्ट ने कहा कि मौजूदा समय में आम लोगों को नर्सिंग सेवा की आवश्यकता है, मगर छात्रों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के तहत उनका हित भी देखा जाना जरूरी है। ऐसे में सरकार बताए कि वह क्या करने जा रही है।