धार्मिक स्थलों के अनलॉक होने के हफ्ते भर बाद भी तीर्थनगरी के चार प्रमुख मंदिरों के ताले नहीं खुल सके हैं। ये मंदिर सेना के आयुध भंडार डिपो परिसर और आसपास में स्थित हैं। प्रयागराज मेला प्राधिकरण और जिला प्रशासन के अफसरों की सैन्य अधिकारियों से वार्ता के बाद भी इन मंदिरों के प्रवेश द्वार खोलने पर सहमति नहीं बन सकी है।
इस वजह से सोमवार को प्रसिद्ध मनकामेश्वर मंदिर के दर्शन, रुद्राभिषेक और आरती से हजारों श्रद्धालु वंचित रह गए। मंदिर जाने वाले रास्ते प्रवेश द्वार पर दिन भर श्रद्धालु रास्ता खुलने का इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें निराश होना पड़ा। अकबर के किले में स्थित मूल अक्षयवट, सरस्वती कूप, रामजानकी मंदिर और पातालपुरी मंदिर को धार्मिक स्थलों का लॉक डाउन खुलने के हफ्ते भर बाद सोमवार को भी नहीं खोला जा सका।
सोमवार होने की वजह से मनकामेश्वर मंदिर में दर्शन-पूजन, रुद्राभिषेक और आरती के लिए सुबह से ही श्रद्धालु जुटने लगे, लेकिन रास्ता बंद होने की वजह से तमाम लोग यमुना बैंक-सरस्वती घाट रोड स्थित सेना के मेन गेट पर ही फूलमाला और जल अर्पित कर लौट गए।
मनकामेश्वर मंदिर के पुजारी श्रीधरानंद ने बताया कि सख्ती की वजह से मंदिर के सेवादार व कर्मचारियों को भी आने जाने में दिक्कतें हो रही हैं। उन्होंने बताया कि बीते सात जून को प्रशासन के साथ धर्मगुरुओं की बैठक के दौरान उन्होंने इस मसले को उठाया था, बावजूद इसके मंदिर नहीं खोला जा सका।
पातालपुरी मंदिर के प्रधान पुजारी योगेश्वर रवींद्र नाथ गोस्वामी ने बताया कि किले में पुजारियों को भी प्रवेश करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रयागराज मेला प्राधिकरण के अफसरों से भी वार्ता की गई, लेकिन नतीजा नहीं निकल सका। मंदिर में आम श्रद्धालुओं को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। इससे हजारों श्रद्धालु वापस हो रहे हैं। सोमवार को भी श्रद्धालु किला परिसर में स्थित देवी-देवताओं का दर्शन नहीं कर सके।
मनकामेश्वर का रास्ते को लेकर एडीएम सिटी से वार्ता
प्रयागराज। राजस्व परिषद बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री एडवोकेट विजय चंद्र श्रीवास्तव ने मनकामेश्वर मंदिर केरास्ते को न खोलने की वजहों पर एडीएम सिटी अशोक कन्नौजिया से वार्ता की। एडीएम ने इस प्रकरण पर सेना के अधिकारियों से बात करने का भरोसा दिलाया।
एडवोकेट विजय चंद्र ने बताया कि वर्ष 2005 में मनकामेश्वर के रास्ते के विवाद को लेकर दाखिल जनहित याचिका में मंदिर का रास्ता न रोके जाने की बात कही जा चुकी है। ऐसे में एक बार फिर रास्ता बंद करना अवमानना की श्रेणी में आता है। उन्होंने बताया कि इस मामले में 508 आर्मी बेस के कमांडर को उन्होंने नोटिस भेजा है। जल्द ही इस प्रकरण को लेकर उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दाखिल की जाएगी।
सेना के अफसरों से वार्ता की गई है, ताकि इस मसले का हल निकाला जा सके। कुछ आंतरिक कारणों से सेना अभी इन मंदिरों में आम श्रद्धालुओं के प्रवेश की अनुमति देने के लिए सही समय का इंतजार कर रही है।
रजनीश कुमार मिश्र, सिटी मजिस्ट्रेट/प्रभारी अधिकारी माघ मेला।