मोहर्रम की तीसरी तारीख पर शनिवार को गढ़ी सराय, सब्जी मंडी का कदीमी मेहंदी जुलूस शानो शौकत से उठाया गया। गुलामाने हुसैन मोहर्रम मेहंदी कमेटी के जूलूस में बड़ी संख्या में शामिल अकीदतमंदों ने शिरकत करते हुए या अली या हुसैन की सदाएं बुलंद की। जुलूस में फूलों की कारीगरी खास रही। जुलूस में मेहंदी को कंधा देने के लिए लोगों में होड़ लगी रही।
जुलूस कदीमी रास्ते से होता हुआ वापस अपनी पुरानी जगह पर पहुंचकर समाप्त हुआ। इस दौरान पानी तथा शरबत के लंगर जारी रहे। जुलूस में अजीम पहलवान, गुलाम नबी, मो. नजमी, गुफरान, मो. आमिर, एजाज अहमद, फरीद साबरी व इनामुल्लाह समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
इसी क्रम में दरियाबाद में तीसरी मोहर्रम का कदीमी जुलूस कदम रसूल से निकाला गया, जो इमामबाड़ा हुसैन अली खां पर पहुंचकर पूरा हुआ। आयोजक जौरेज हैदर के मुताबिक अंजुमन हाशिमिया के जिया अब्बास, यासिर सिब्तैन, फैजी आदि ने शायर मजहर हुसैन का कलाम पेश किया। मुंतजिम मुतवल्ली मंजर अली ने शुक्रिया अदा किया।
वहीं दूसरी ओर चक, जीरो रोड, घंटाघर, शाहगंज, बरनतला, पत्थर गली, रानीमंडी, करेली, करेलाबाग, बख्शी बाजार और दरियाबाद समेत तमाम इलाकों में मजलिसों का सिलसिला जारी रहा। नागरिक सुरक्षा के मुख्य वार्डेन नासिर जैदी के आवास पर हुई मजलिस में मौलाना मो.जावेद खान ने करबला के मसायब बयां किए। अंजुमन गुंचए कासिमिया ने नौहा व मातम का नजराना पेश किया। दरियाबाद कमाल खां के टेकरे पर कदीमी मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना इरफान हैदर ने इमाम हुसैन की प्यास और परिवार वालों पर हुए जुल्म को बयां किया।
इससे पहले शुक्रवार को दूसरी मोहर्रम पर बड़ा ताजिया मोहर्रम कमेटी की ओर से सैकड़ों वर्ष पुराना अलम का कदीमी जुलूस निकाला गया। जानसेनगंज स्थित कमेटी के इमामबाड़े से या अली, या हुसैन की सदाओं के साथ जुलूस बरामद हुआ। आगे-आगे मिर्जापुर से आए अजादारों ने ढोल पर मातमी धुन बजाकर नौजवानों में जोश भरा। बैंड के माध्यम से जुलूस में गमगीन नौहे पढ़े गए। अलम पर अकीदतमंदों ने फूल चढ़ाकर मन्नतें मांगीं। जुलूस अपने कदीमी रास्ते से होता हुआ वापस इमामबाड़े पर पूरा हुआ। जुलूस में कमेटी के अध्यक्ष रेहान खां, सचिव इमरान खां, वसीम खां, फरहत खान, पार्षद कुसुम लता, पार्षद नेम यादव आदि शामिल रहे।
बॉक्सइमाम हुसैन ने किया साबित जुल्म के आगे नहीं झुकेगा सिर
दरियाबाद स्थित शाही इमामबाड़े में मजलिस को खिताब करते हुए इमामे जुमा मौलाना हसन रजा ने कहा, इमामे हुसैन ने यह साबित किया कि हक के लिए अपनी गर्दन तो कटा सकते हैं लेकिन जुल्म के आगे कभी सिर नहीं झुका सकते। मजलिस के बाद अंजुमने मोहाफिजे अजा ने नौहो मातम का नजराना पेश किया। मजलिस में हाजी जफर अब्बास जाफरी, आरए काजमी, तालिब जाफरी, बाकर नकवी, हसन नकवी, मुशीर अब्बास, अख्तर अब्बास आदि मौजूद रहे।
सातवीं पीढ़ी की देखरेख में हो रही मजलिस
दरियाबाद के पठनवल्ली स्थित 250 वर्ष पुराने इमामबाड़े अबुल हसन खां में मोहर्रम की पहली तारीख से ही मजलिस जारी है। उम्मुलबनीन सोसायटी के महासचिव सैयद मो.अस्करी के अनुसार इमामबाड़े में 250 साल पुराना चांदी का पंजा हर मोहर्रम पर सजाया जाता है। इमामबाड़े की तामीर कराने वाले अकबर अली खां की सातवीं पीढ़ी के मशहद अली खां की देखरेख में मजलिसें होती हैं। पांचवीं मोहर्रम को इमामबाड़े से निकलने वाले जुलूस में अंजुमन हाशिमिया जंजीर का मातम पेश करती है।