जिलहिज्जा की 29वीं तारीख बृहस्पतिवार को चांद के दीदार के साथ मोहर्रम का एलान हो गया। सुन्नी मरकजी रुपये हिलाल कमेटी केकाजी-ए-शहर मुफ्ती शफीक अहमद शरीफी ने चांद की शरई तस्स्दीक का एलान किया।
इसी के साथ शनिवार को मोहर्रम की पहली तारीख से अंजुमनें मातम शुरू कर देंगी। इस बार कोरोना संक्रमण की वजह से किसी तरह के न तो जुलूस निकलेंगे और ना ही सामूहिक तौर पर कहीं जमावड़ा होगा, लेकिन अली असगर का झूला, अलम और दुलदुल सजाने की तैयारियां की गई हैं।
माहे मोहर्रम के चाद के साथ गम का महीना शुरू हो गया। देर शाम मोहर्रम के आगाज के साथ रानी मंडी, बख्शी बाजार,करैली, दरियाबाद, दायरा शाह अजमल,सब्जी मंडी सहित अन्य मोहल्लों के घरों की छतों व बारजों पर स्याह परचम लगा दिए गए। अब कर्बला के शहीदों की याद में 68 दिनों तक गम मनाने का सिलसिला चलेगा।
इसी के साथ घरों में अजाखाने सजा दिए गए। शोक के प्रतीक के तौर पर स्याह परचम भी घरों की छतों, बारजों पर लहराने लगे हैं। शिया चांद मरकजी कमेटी की ओर से भी चांद देखे जाने का एलान किया गया। अंजुमन गुंचा- ए-कासिमिया के प्रवक्ता सैयद मोहम्मद अस्करी के मुताबिक चांद की तस्दीक के साथ ही माहौल गमगीन हो गया।
ओलमाओं ने भी चांद की तस्दीक की। इसकेबाद घरों व अजाखानों में अलम, ताबूत, ताजिए, झूला व जरी को सजा दिया गया। शुक्रवार को पहली मोहर्रम से सरकारी गाइड लाइन पर अमल करते हुए सिर्फ पांच लोगों की मौजूदगी में घरों व अजाखानों में मजलिसें शुरू होंगी।
नहीं निकला इस्तकबाल -ए -अजा का जुलूस
प्रयागराज। दरियाबाद व रानीमंडी से पूर्व वर्षों की भांति निकलने वाला इस्तेकबाल -ए -अजा का जुलूस इस बार नहीं निकाला गया। इस जुलूस में कई मातमी अंजुमनें शिरकत करती थीं। लेकिन, मजहबी शिया धर्म गुरु आयातुल्ला सिसतानी व आयातुल्ला खामेनई की कोविड -19 के दृष्टिगत अपील पर सोशल डिस्टेंसिंग के साथ मोहर्रम मनाने का निर्णय लिया गया। इस वजह से भीड़भाड़ वाले किसी भी बड़े आयोजन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।