इनके बाद स्मृति गुप्ता ने पारंपरिक बंदिश ए री सकी मोरे पिया घर आए...के बोल पर आमद के बाद भावों-इशारों के जरिए अपने नृत्य से सबका ध्यान खींचा। फिर, राग कलावती में निबद्ध कथक नृत्य सम्राट पद्म विभूषण पं. विरजू महाराज की बंदिश पर उन्नति मिश्रा, आस्था कुमार, स्मृति, समृद्धि श्रीवास्तव ने तराना पर नृत्य से खूब तालियां बटोरीं। इनके बाद वृंदावन से आए आशीष सिंह ने कथक पर महारास समेत नृत्य के कई भावों को सजाया।
अंतर में लखनऊ से आईं नृत्यांगना अर्चना तिवारी ने अर्धांग, रामकथा को तो कथक की बंदिशों में पिरोया ही उन्होंने ठुमरी की बंदिश बाबुल मोरा जिया घबराए... के बोल पर अपने भावों की संगीत रसिकों के जेहनोदिल पर अमिट छाप छोड़ दी। अंत में कथक केंद्र की निदेशक उर्मिला शर्मा ने आभार जताया। संचालन किया संजय पुरुषार्थी और कौमुदी राय ने।
सम्मानित किए गए कलाकार
हंडिया। हंडिया माटी कथक महोत्सव में नृत्य कला को प्रस्तुत करने वाले कलाकार काव्या, समृद्धि, वीरा, सुकृति, स्नेहा, चहक, रोहितकुमार, स्मृति गुप्ता, उन्नति मिश्रा, आस्थाकुमार, अर्चना तिवारी को जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ वीके सिंह द्वारा सम्मानित करके प्रोत्साहित किया गया।