झूंसी थाना क्षेत्र के छतनाग और नीबी गांव के गंगा घाट पर बालू माफिया बेखौफ बालू खनन में जुटे हुए हैं। पुलिस की सरपरस्ती में रात के अंधेरे में मां गंगा का सीना छलनी किया जा रहा है। रातभर गंगा के फेटे से निकाली जाने वाली बालू घाट किनारे नाव से पहुंचाई जाती है। इसके बाद धीरे-धीरे कर बालू का उठान वहां से कराकर सुरक्षित अड्डे पर ले जाकर डंप कर दिया जा रहा है।
उधर, जिम्मेदार विभाग केअफसर और कर्मचारी सबकुछ जानते हुए भी अंजान बने हुए हैं। इससे स्थानीय लोगों में आक्रोश व्याप्त है।इस वक्त पूरे प्रदेश में बालू खनन पूरी तरह बंद है। इसके बावजूद सरकारी आदेश को धत्ता बताते हुए बालू माफिया बेखौफ सक्रीय हैं। झूंसी के छतनाग और नीबी गंगा घाट पर पिछले कई दिनों से बालू खनन खुलेआम किया जा रहा है।
सरकारी मशीनरी ही सरकार की मंशा पर पानी फेरने पर उतारू है। इसी का नतीजा है कि झूंसी क्षेत्र में बेखौफ मिट्टी के बाद अब बालू का खनन किया जा रहा है। कुंभ मेले के दौरान झूंसी के छतनाग में भी करोड़ों की लागत से दो पक्के घाट बनाए गए थे। इन्हीं में से एक छतनाग के नागेश्वर मंदिर घाट के आसपास इन दिनों बालू का बेखौफ खनन किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आधी रात को सैकड़ों मजदूरों को लगाकर बालू का खनन किया जा रहा है। रात के अंधेरे में शुरू होने वाला खनन का अवैध कारोबार इलाकाई पुलिस की मदद से भोर होने तक बदस्तूर जारी रहता है। हालत यह है कि भारी खनन के कारण पक्के स्नान घाट पर खतरा मंडराने लगा है।
साथ ही पूरी रात ओवरलोड ट्रक और ट्रैक्टर की आवाजाही के कारण कुंभ मेला बजट से तैयार की गईं सड़कें भी ध्वस्त होने लगी हैं। इसके अलावां नीबी घाट पर भी रोजाना साठ से सवा सौ डंफर बालू का खनन किया जा रहा है। यहां से होने वाली बालू निकासी को बालू माफिया किसी सुरक्षित स्थान पर ले जाकर डंप कर दे रहे हैं। वहां से बालू के कारोबार को चोखा किया जाता है। इस संबंध में एसडीएम फूलपुर विवेक चतुर्वेदी का कहना है कि उन्हें बालू खनन की जानकारी नहीं है। अगर खनन हो रहा है तो जांच कर बालू माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।