मंडलीय खरीफ गोष्ठी में कोरोना संकट के बीच कृषि पर बढ़ती निर्भरता को ध्यान में रखकर योजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। कृषि उत्पादन आयुक्त (एपीसी) आलोक कुमार ने स्पष्ट किया कि नए परिदृश्य में खेती के साथ इस पर आधारित उद्योगों की भी मांग बढ़ी है। इसलिए इसमें किसी तरह की कमी नहीं रहनी चाहिए।
एपीसी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से प्रयागराज के अलावा वाराणसी और विंध्याचल मंडल में खरीफ फसलों की खेती की समीक्षा की। कलक्ट्रेट स्थित एनआईसी में मंडलायुक्त आर.रमेश कुमार समेत अन्य विभागों के प्रमुख अफसर तथा किसान मौजूद रहे। कई अन्य अफसर भी संगम सभागार में मौजूद रहे।
ताकि, जरूरत पड़ने पर उन्हें बुलाया जा सके। एपीसी ने खाद, बीज, कीटनाशक, सिंचाई, बिजली आपूर्ति आदि पर बिंदुवार जानकारी ली और आवश्यक निर्देश दिए। किसानों ने नहरों में पानी न होने के साथ हाइब्रिड धान की खरीद में आने वाली परेशानी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। एपीसी ने बताया कि इसे लेकर पहले से ही गाइडलाइन जारी है।
उन्होंने बताया कि कुल लक्ष्य का 35 फीसदी ही हाइब्रिड धान की खरीद होगी। इसके अलावा अन्य प्रजाति के धान में 67 फीसदी चावल मिलना चाहिए। वहीं हाइब्रिड धान में 64 प्रतिशत चावल मिलने का मानक निर्धारित है। यानी, तीन प्रतिशत की छूट दी गई है। किसानों ने सोलर पंपों की संख्या बढ़ाने की भी मांग की। गोष्ठी में किसानों संगठनों (एफपीओ) की जरूरत को देखते हुए इसे मजबूत करने पर जोर दिया गया।
गोष्ठी में मौजूद उप निदेशक कृषि विनोद कुमार ने बताया कि एफपीओ के पास बीज की उपलब्धता से लेकर बाजार उपलब्ध कराने तक की जिम्मेदारी होगी। एपीसी ने किसानों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए मंडियों की सभी बाधाएं दूर करने का निर्देश दिया। उन्होंने पशुओं के लिए चारा तथा अन्य इंतजाम भी समय से कर लेने के निर्देश दिए। मंडलायुक्त आर.रमेश कुमार ने कौशाम्बी में मालगाड़ी से सामान पहुंचाए जाने की बात कही। गोष्ठी में किसान सम्मान निधि समेत कृषि विभाग की अन्य योजनाओं और उसकी प्रगति पर भी विस्तार से चर्चा हुई।