प्रत्यक्षदर्शियों में शामिल पार्षद कमलेश सिंह, पूर्व पार्षद शिवसेवक सिंह ने प्रशासन, पुलिस और गंगा प्रदूषण इकाई के अफसरों को गैस रिसाव की जानकारी दी। बताया कि भोर में करीब साढ़े चार बजे बक्शी बांध पर टहलने गए लोगों ने क्लोरीन गैस की तीखी गंध महसूस की। थोड़ी ही देर में रिसाव की खबर पूरे शहर में फैल गई।
अफरातफरी के माहौल में लोग इधर उधर भागने लगे। मौके पर पहुंची पुलिस ने रास्ता बंद कराकर लोगों को बांध रोड से हटाया। लाउडस्पीकर से एनाउंसमेंट कराया गया। मदद के लिए फायर ब्रिगेड को भी बुलाया गया। दिन में करीब 11 बजे गंगा प्रदूषण इकाई के अफसर मौके पर पहुंचे। सिलिंडरों को किसी तरह से निकालकर खुले में फेंका गया। दोपहर बाद तक स्थिति सामान्य हो सकी।
गैस से घास जली, पेड़ों की पत्तियां हुईं पीली बदरंग
अमोनिया गैस के रिसाव और सिलिंडर बाहर फेंके जाने से एसटीपी परिसर में घास जल गई। वहां लगे पेड़ों की पत्तियां बदरंग हो गईं। कुछ पेड़ों की पत्तियों का रंग पीला हो गया। इस दौरान एसटीपी के इर्दगिर्द करीब 500 मीटर के क्षेत्र में लोगों ने आंखों में जलन और पानी निकलने की शिकायत के साथ सांस लेने में दिक्कत की परेशानी बताई।
घंटों देरी से पहुंचे अफसर
एसटीपी के खतरे वाले जोन में गैस रिसाव की सूचना के बाद भी संचालन का जिम्मा संभाल रही कंपनी और गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अफसर घंटों देरी से वहां पहुंचे। इकाई के प्रबंधक आनंद दुबे के मुताबिक तकनीकी खामी से खाली सिलिंडर में बची गैस का रिसाव हुआ। समय रहते गड़बड़ी दूर कर ली गई। प्लांट के साथ जनहानि नहीं हुई।
सलोरी स्थित 14 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी में खाली सिलिंडर से गैस निकली थी। इसका प्रयोग गंदे पानी के ट्रीटमेंट में किया जाता है। किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ है। मामले की जांच कराई जाएगी। - कौशल किशोर, विद्युत यांत्रिक परियोजना प्रबंधक, गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई