कोविड-19 के संक्रमण की वजह से शहर की सड़कों की बजाए मंदिर परिसर में ही रथारूढ़ होकर भक्तों को दर्शन देने के बाद रविवार को भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमाओं को सविधि मंत्रोच्चार के साथ विश्राम कराया गया। विश्राम यात्रा की भी रस्मअदायगी की गई। भगवान को छप्पन भोग अर्पित किया गया और रत्नजड़ित वस्त्रों, आभूषणों से मोहक झांकी सजाई गई।
वर्षों की परंपरा का पालन करते हुए रविवार को प्रभु जगन्नाथ की विश्राम यात्रा की रस्म पूरी की गई। रथ यात्रा इस विश्राम यात्रा के मौकेपर कोरोना वायरस के उत्पन्न स्थिति में सरकार की गाइड लाइन का पूरा पालन किया गया। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए प्रभु जगन्नाथ को विद्या गौरी वाटिका सती चौरा पर छप्पन भोग अर्पित किया गया।
56 प्रकार के व्यंजनों में दूध,दही,मक्खन,रबड़ी, मलाई, मिसरी, मेवा, काजू किसमिस, मुरब्बा, आचार, पापड़, मालपुआ, गुलाब जामुन, खीर, कढ़ी -चावल, रोटी, सब्जी, फल समेत कई तरह की मिठाइयां सजाई गई थीं। कोषाध्यक्ष जयराम गुप्ता, सह संयोजक राजेश केसरवानी उपाध्यक्ष दाऊ दयाल गुप्ता, पूर्व पर्षद विजय वैश्य ने भगवान को खीर का प्रसाद चढ़ाया।
सबसे पहले समिति के अध्यक्ष गोवर्धन दास गुप्ता की ओर से भगवान जगन्नाथ को छप्पन प्रकार के व्यंजनों से भोग लगाया गया। इसके पूर्व उन्होंने विधि विधान के अनुसार पूजन -अर्चन किया इस अवसर पर भक्तों ने भजन गाकर भगवान जगन्नाथ, गणेश, भ्राता बलभद्र एवं बहन सुभद्रा को 56 भोग के लिए आमंत्रित किया।
भोग अर्पित करने के बाद भगवान जगन्नाथ का प्रसाद वितरण किया गया। इससे पहले गगन दासगुप्ता, अरुण कुमार साहू, नीरज सिंह ने भगवान जगन्नाथ का मनोहारी शृंगार रत्न जड़ित पोशाकों, आभूषणों से किया। इस मौके पर मुख्य रूप से समिति के जयराम गुप्त, दुर्गा प्रसाद गुप्ता, बसंत लाल आजाद, राजेश केसरवानी, विजय वैश्य, दाऊ दयाल गुप्त,कृष्ण भगवान केसरवानी,उदय कुमार, त्रिलोकी केसरवानी, चंद्र प्रकाश सोनी, हैप्पी कसेरा,अमर वैश्य मुन्ना भैया ने भगवान जगन्नाथ जी महाआरती की।