निर्माण में अनियमितता के आरोप
जिम्मेदार अफसर एक ओर बारिश व बाढ़ को घटना का कारण बता रहे हैं। वहीं आरोप यह भी लग रहे हैं कि नवनिर्मित इमारत की चहारदीवारी का इस तरह ढह जाना निर्माण में अनियमितताओं की ओर इशारा करता है। आरोप है कि नींव और मिट्टी को मजबूत करने के लिए पर्याप्त तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया। आशंका यह भी है कि निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ, जिसके कारण बारिश के एक झटकेे में भी दीवार टिक नहीं सकी।
हैंडओवर की प्रक्रिया में और बढ़ सकता है समय
परियोजना की लागत और समय सीमा पर नजर डालें तो निर्माण कार्य 2024 के भीतर पूरा होना था मगर 2025 में सात महीने बीतने के बाद भी हैंडओवर नहीं हो पाया है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि अंतिम निरीक्षण, फिनिशिंग कार्य और कुछ तकनीकी सुधार के कारण हैंडओवर में देरी हो रही थी। अब दीवार गिरने के बाद यह प्रक्रिया और लंबी खिंचने की संभावना है।
जांच की उठ रही मांग
इस घटना के बाद जांच कराए जाने की भी मांग हो रही है। कहा जा रहा है कि करोड़ों रुपये की लागत से बने सरकारी भवन का यह हाल निर्माण कार्यों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। यदि जांच में अनियमितता की बात सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
होने चाहिए थे अतिरिक्त सुरक्षा उपाय
शुक्रवार को ढही दीवार थाना भवन के जिस हिस्से में थी वह सीधे मुख्य सड़क की ओर खुलती है। दीवार गिरने से थाना परिसर अब एक तरफ से खुल गया है। जानकार कह रहे हैं कि यह क्षेत्र बाढ़ प्रवाह क्षेत्र में आता है और इस भूमि पर पहले से ही जलभराव की समस्या रहती है। ऐसे में निर्माण डिजाइन में अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए जाने चाहिए थे।