सूतक लगते ही शनिवार की रात 10:30 बजे मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए। इसी के साथ रविवार को ग्रहण के मोक्षकाल तक मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे। संगम स्थित बड़े हनुमान, मां अलोपशंकरी, मां कल्याणी देवी, मां ललिता देवी, हनुमत निकेतन, न्यायविद् हनुमान, अलौकिक शनिधाम, तक्षकतीर्थ, पड़िला महादेव, सोमेशेवर महादेव, मकामेश्वर, नागवासुकि, वेणी माधव समेत शहर के अन्य मंदिरों के कपाट सविधि पूजन आरती के साथ बंद कर दिए गए।
सूर्य ग्रहण से पहले सूतक काल में सभी शुभ कार्य भी स्थगित कर दिए गए। इसी के साथ भगवान सूर्य के मोक्ष की कामना से मंदिरों, मठों के बाहर और घरों में सामाजिक दूरी का पालन करते हुए भजन-कीर्तन शुरू कर दिया गया।
रविवार को संगम में स्नान कर मंत्रों का जाप और ईष्ट देव का लोग ध्यान करेंगे। ज्योतिषाचार्य पं ब्रजेंद्र मिश्र के अनुसार सूतक काल में लोगों को अन्न जल नहीं ग्रहण करना चाहिए और न ही देव मूर्तियों को स्पर्श करना चाहिए। हालांकि बालक, वृद्ध और रोगी के लिए यह प्रतिबंध नहीं है।
ग्रहण पर छह ग्रह होंगे वक्री
सूर्य ग्रहण पर छह ग्रह वक्री होंगे। ग्रहण काल में राहु और केतु तो हमेशा वक्री रहते ही हैं, इस बार शनि, बुध, गुरु और शुक्र भी वक्री रहेंगे। ऐसे में ग्रहों की विपरीत दशा से बचने के लिए तिल, गुण, अन्न और वस्त्र का दान अवश्य करना चाहिए। ज्योतिषाचार्य आशुतोष वार्ष्णेय के अनुसार छह ग्रहों की वक्री चाल से अक्तूबर तक का समय परेशानी से भरा रह सकता है।
महाआरती के साथ आज खुलेंगे बड़े हनुमान के पट
बड़े हनुमान मंदिर के महंत और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के निर्देशन में शनिवार की रात महाआरती के सात मंदिर के पट बंद कर दिए गए। बताया कि सूर्य ग्रहण के मोक्षकाल के बाद बड़े हनुमान मंदिर में लेटे हनुमानजी की प्रतिमा का गंगाजल, दूध और दही से अभिषेक किया जाएगा। शाम चार बजे महाआरती के साथ मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खोला जाएगा।