इधर खुशी की हालत में सुधार नहीं हुआ तो मुकेश उसे लेकर शुक्रवार सुबह एक बार फिर उसी निजी अस्पताल गए, जहां खुशी का ऑपरेशन हुआ था। वहां गेट पर ही उन्हें रोक दिया गया। वह गोद में खुशी को लेकर करीब दो घंटे इधर से उधर भटकते रहे, लेकिन गार्ड ने उन्हें भीतर नहीं जाने दिया।
इस बीच दर्द से तड़प रही खुशी ने अस्पताल के गेट पर पिता की गोद में ही दम तोड़ दिया। मासूम की मौत से नाराज परिवारीजन हंगामा करने लगे। करेंहदा से भी परिचितों को बुलाया गया। थोड़ी ही देर में वहां जुटी भीड़ हंगामा करने लगी। अस्पताल प्रशासन की सूचना पर वहां पिपरी, कोखराज, परिश्चम शरीरा सहित कई थानों की फोर्स पहुंच गई। सीओ चायल भी पहुंचे।
सीओ ने लोगों को शांत कराया। सीओ ने बताया कि खुशी के परिजनों ने मुकदमा दर्ज कराने को तहरीर नहीं दी है। शव पोस्टमार्टम के लिए मंझनपुर भेजा गया है। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
उधर जिलाधिकारी भानुचंद्र गोस्वामी ने कहा है कि मामला बेहद गंभीर है। उन्होंने प्रकरण की जांच के लिए अपर जिलाधिकारी (नगर) व मुख्य चिकित्साधिकारी की दो सदस्यीय टीम गठित की है। जिलाधिकारी ने कहा है कि यदि जांच के दौरान अस्पताल प्रशासन की लापरवाही पाई जाती है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।