खर्च पिछले साल से दोगुना
मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विजय किरन आनंद ने बताया कि इस बार दलदली जमीन की वजह से बसावट एरिया बढ़ाने की योजना है। नदी का जलस्तर नीचे न आने के कारण अतिरिक्त जमीन लेनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि माघ मेले की तैयारियों पर इस बार पिछले वर्ष की तुलना में दोगुना खर्च आने का अनुमान है। पिछले वर्ष 80 करोड़ के आसपास खर्च हुआ था।
तीन माह में तैयारी मेला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती
सिर्फ तीन माह के भीतर जमीन की पैमाइश, टेंडर प्रक्रिया, सेक्टर वार बसावट, संस्थाओं को स्थान आवंटन और मूलभूत सुविधाओं (सड़क, बिजली, पानी, शौचालय आदि) की व्यवस्था करना मेला प्राधिकरण के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। महाकुंभ के ठीक बाद होने वाला यह माघ मेला, धार्मिक दृष्टि से तो महत्वपूर्ण है ही, प्रशासनिक दृष्टि से भी मेला प्राधिकरण की क्षमता और तैयारी की बड़ी परीक्षा साबित होगा। उप मेलाधिकारी विवेक शुक्ला का कहना है कि तैयारियां शुरू हो गई है। दलदल भूमि के नाते दिक्कत जरूर आ रहीं हैं। ऐसे में अतिरिक्त लैंड लिए जाने की तैयारी की जा रहीं हैं।