कई जगह हो गई है अधिक कटान
लेकिन, ऐसा हो पाएगा या नहीं अभी भविष्य पर निर्भर करेगा। सलाहकार समिति की शुक्रवार को होने वाली बैठक में इन मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। नए मेलाधिकारी शेषमणि पांडेय ने सेक्टरवाइज मेले की बसाहट की समीक्षा के बाद समय से काम पूरा करने की अफसरों को हिदायत दी हैै, ताकि तैयारियां पिछड़ने न पाएं। कटान और दलदल की वजह से संगम नोज के अलावा खाक चौक और ओल्ड जीटी के पास कटान अधिक हो गई है।
इस वजह से उन इलाकों में समतलीकरण में भी दिक्कतें आने लगीं हैं। जल प्रवाह तेज होने और किनारों पर कटान बढ़ने से सबसे अधिक चुनौती पांटून पुलों के निर्माण को लेकर है। बावजूद इसके पांटून पहुंचाने और लिंक करने का काम तेज कर दिया गया है। इस बार पांच पांटून पुलों के निर्माण के लिए छह सौ पीपे की जरूरत है। इसके सापेक्ष सौ पीपे बृहस्पतिवार तक पहुंचा दिए गए थे।
गंगा में चार गुना अधिक प्रवाह होने से दिक्कतें
गंगा में प्रवाह तेज होने से मेला बसाने में दिक्कतें बढ़ती जा रही हैं। सिंचाई विभाग के अभियंताओं की रिपोर्ट के मुताबिक माघ मेला के समय सात हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जाता था। लेकिन, इस बार अभी 28 हजार क्यूसेक जल नियमित गंगा में आ रहा है। इस वजह से प्रवाह में तेजी की वजह से कटान बढ़ती जा रही है।