कुंभ-2019 के दौरान बनाए गए पीपे दूसरे जिलों में भेज दिए जाने की वजह से इस बार माघ मेले में पीपे कम पड़ गए हैं। कटान की वजह से कई पुलों की लंबाई बढ़ने की वजह से इस बार पीपे की खपत अधिक होने की बात कही जा रही है।
संगम की रेती पर बसने वाले माघ मेले के लिए गंगा पर निर्माणाधीन पांटून पुलों के लिए पीपे कम पड़ गए हैं। शनिवार को पांटून पुलों की प्रगति जानने के लिए स्थलीय निरीक्षण करने पहुंचे अधीक्षण अभियंता एके द्विवेदी ने पीपे कम पड़ने पर एई-जेई को कड़ी फटकार लगाई। एसई ने चेताया कि तय समय के भीतर अगर पांटून पुलों का निर्माण पूरा नहीं हुआ तो संबंधितों के खिलाफ निलंबन की संस्तुति की जाएगी।
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कुंभ-2019 के दौरान बनाए गए पीपे दूसरे जिलों में भेज दिए जाने की वजह से इस बार माघ मेले में पीपे कम पड़ गए हैं। कटान की वजह से कई पुलों की लंबाई बढ़ने की वजह से इस बार पीपे की खपत अधिक होने की बात कही जा रही है। साथ ही इस बार माघ मेले में पांच पुलों के अलावा दो पांटून पुल फाफामऊ में भी बनाए जा रहे हैं। इन सात पांटून पुलों के निर्माण 612 पीपे लगने का अनुमान है। शनिवार तक 339 पीपे गंगा में उतार दिए गए हैं, लेकिन कम पड़ रहे पीपों की भरपाई को लेकर अभियंताओं की परेशानी बड़ गई है।
हालांकि कहा जा रहा है कि जरूरत पड़ी तो फाफामऊ के पीपों को माघ मेले में शिफ्ट कराकर काम पूरा कराया जाएगा। एसई एके द्विवेदी ने बताया कि ओल्डजीटी पुल के निर्माण में मजदूर कम पाए गए। इसके अलावा पीपे भी कम थे। इसलिए अभियंताओं को आगाह किया गया। लेकिन, पता चला है कि दूसरे पुलों के निर्माण में कम पीपे लग रहे हैं। इससे काम पूरा कराने में दिक्कतें नहीं आनी चाहिए।