जोरों से चल रही है माघ मेले की तैयारी।
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संगम की रेती पर सतों-भक्तों केसमागम के रूप में माघ मेला बसाने के लिए भूमि सुविधाओं के लिए आवेदन शुरू हो गए हैं। सांस्कृतिक, आध्यात्मिक संस्थाओं की ओर से कोवि-19 की गाइड लाइन के बीच माघ मेला बसाने की तैयारी की जा रही है। आचार्यबाड़ा, दंडीबाड़ा और खाक चौक की ओर से भूमि सुविधाओं के आवंटन के लिए मेला प्रशासन को प्रस्ताव भेजा गया है। जल्द ही मेला प्रशासन की ओर से भूमि आवंटन की प्रक्रिया आरंभ की जाएगी।
कोरोना संक्रमण की वापसी के बीच माघ मेला बसाने की तैयारियां जोर पकड़ रही हैं। ऐसे में करीब पांच लाख से अधिक कल्पवासियों के शिविरों को संक्रमण मुक्त रखना इस बार मेला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी। फिलहाल प्रशासनिक तैयारियों के बीच संतों -भक्तों ने भूमि सुविधाओं के लिए मेला प्रशासन को प्रस्ताव भेजना शुरू कर दिया है।
अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद ने कोरोना संक्रमण को देखते हुए इस बार 110 बीघा भूमि आवंटित करने के लिए माघ मेला प्रशासन को प्रस्ताव दिया है। परिषद के अध्यक्ष ब्रह्माश्रम ने शुक्रवार को बताया कि पिछली बार 85 बीघा भूमि दंडी बाड़ा को मिली थी। इस बार कोरोना संक्रमण मे देखते हुए दूर-दूर शिविर बसाने की योजना के तहत 25 बीघा अतिरिक्त भूमि की मांग की गई है।
इसी तरह आचार्यबाड़ा के लिए नए सिरे से गठित रामानुजनगर की कमेटी ने माघ मेला प्रशासन को भूमि आवंटन के लिए प्रस्ताव भेजा है। इस संस्था के अध्यक्ष कौशल जी महाराज ने बताया कि पिछली बार 80 बीघे भूमि आवंटित की गई थी। इस बार परिस्थिति को देखते हुए रकबा बढ़ाया जाना चाहिए। किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर कौशिल्यानंद गिरि टीना मां ने भी भूमि सुविधाओं के लिए आवेदन कर दिया है।