prayagraj news : माघ मेले की तैयारी जोरशोर से चल रही है।
- फोटो : prayagraj
पिछले वर्ष की तुलना में इस बार माघ मेले का आकार 30 प्रतिशत घटाने के शासन केनिर्णय पर अमल करते हुए क्षेत्रफल कम कर दिया गया है। 538 हेक्टेयर में मेला बसाया जाएगा। इसके लिए कोविड-19 की गाइड लाइन का पालन करते हुए संक्रमण रोकने के पुख्ता इंतजाम भी किए जा रहे हैं, ताकि महीने भर संगम तट पर जप, तप, ध्यान के दौरान संतों-भक्तों और कल्पवासियों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। इसी के साथ माघ मेले का लेआउट तैयार कर लिया गया है।
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चार सेक्टर में मेला दूर-दूर बसाया जाएगा। इसके लिए पांच पांटूनपुलों के निर्माण के लिए निविदा कराने की तैयारी है। फिलहाल संगम की रेती पर भूमि समतलीकरण का काम तेज कर दिया गया है। समय कम होने की वजह से तय अवधि में मेला बसाना इस बार अफसरों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। इस बार मेले में सिर्फ साधु-संतों और कल्पवासियों को ही बसाया जाएगा। अरसा बाद यह पहला मौका है जब अरैल में माघ मेला के शिविर नहीं लगाए जाएंगे। खाक, चौक, आचार्यबाड़ा और दंडीबाड़ा के अलावा प्रयागवाल तीर्थपुरोहितों को गंगा पार झूंसी क्षेत्र में भूमि आवंटित की जाएगी।
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