माघ मेला क्षेत्र के कई और हिस्सों में कटान से पानी फैला, दलदल के चलते मेला सेक्टरों में बिजली व पेयजल की पाइप लाइन बिछाने में दिक्कत
पीडब्ल्यूडी के आग्रह पर गंगा का प्रवाह रोकने में सिंचाई विभाग ने जताई असमर्थता
प्रयागराज। शनिवार को गंगा में प्रवाह बढ़ने से कटान तेज हो गई। त्रिवेणी और महावीर मार्ग के बीच शाम तक 10 मीटर से अधिक किनारा कटकर जलमग्न हो गया। लगातार कटान से माघ मेला क्षेत्र के कई हिस्सों में दलदल बनने से चिंता बढ़ गई है। चकर्ड प्लेट मार्ग के अलावा बिजली व पेयजल की पाइप लाइन बिछाने का काभी भी दलद केचलते प्रभावित हो रहा है। अभियंताओं ने उच्चाधिकारियों को इससे उत्पन स्थिति की जानकारी दी, लेकिन पानी रोकने की दिशा में कदम नहीं उठाया जा सका। कहा जा रहा है कि इसी तरह पानी आता रहा तो मेला बसाने में मुश्किल पैदा हो जाएगी।
गंगा की धारा तेज होने से माघ मेला क्षेत्र के बड़े हिस्से में लगातार कटान बढ़ती जा रही है। कटान से माघ मेला के सभी पांच सेक्टरों को जोड़ने के लिए गंगा पर बनाए गए पांच पांटून पुलों को खतरा पैदा होने की आशंका है। शनिवार की शाम त्रिवेणी और महावीर पांटून पुलों के बीच का किनारा कई जगह कट गया। ठेकेदार की सूचना पर मेला डिवीजन के अभियंताओं ने मौके पर पहुंचकर स्थिति की जानकारी ली, लेकिन हालात जस केतस रहे। अफसरों केमुताबिक मेला बसाने के लिए सिंचाई विभाग से पानी रोकने के लिए लगातार आग्रह किया जा रहा है, लेकिन अनसुनी की जा रही है। दलदल केचलते चकर्ड प्लेट मार्गों का काम हर सेक्टर में अधूरा पड़ा है। वाले रास्तों पर रेत और मिट्टी डालकर रास्तों को समतल कराने की कोशिश की जा रही है, ताकि वहां चकर्ड प्लेटें बिछाई जा सकें।
अभियंताओं का कहना है कि पिछले डेढ़ दशक में इस बार दलदल केचलते सबसे अधिक मुश्किलें पैदा हुई हैं। मेला क्षेत्र को यातायात से जोड़ने के लिए मोरी मार्ग से लेकर अरैल के बीच में 16 सड़कें बनाई जानी है, लेकिन अभी आधा से अधिक काम बाकी है। सिंचाई बाढ़ खंड के एक्सईएन ब्रजेश सिंह के मुताबिक इस बार अत्यधिक वर्षा के चलते नहरों में पानी की मांग नहीं हो रही है। ऐसे में ऊपर से आ रहे पानी का कहीं इस्तेमाल नहीं हो रहा है। यही वजह है कि बैराजों का पूरा डिस्चार्ज सीधे गंगा में ही आ रहा है। कोशिशों के बाद भी पानी रोकना संभव नहीं रह गया है।
संगम नोज पर खोदाई से गंगा की धारा परिवर्तित होने की आशंका
-दलदल पाटने के लिए पीडब्ल्यूडी के नाम पर जेसीबी से खोदाई, एई ने किया इंकार
प्रयागराज। दलदल पाटने के लिए संगम नोज से रेत व मिट्टी की खोदाई कराए जाने से गंगा की धारा परिवर्तित होने की आशंका पैदा हो गई है। जेसीबी लगाकर शनिवार को दिन भर खोदाई कराई गई। कुछ घाटियों व तीर्थपुरोहितों ने एतराज भी किया, लेकिन उनकी सुनी नहीं गई। खोदाई कराने वालों का कहना था कि पीडब्यूडी की ओर से दलदल पाटने के लिए मिट्टी निकाली जा रही है, लेकिन मेला डिवीजन के अभियंताओं ने इससे इंकार किया है।
पांटून पुल नंबर-1 से आगे संगम नोज पर शनिवार को जेसीबी लगा दी गई। दिन भर में दौ सौ ट्राली से अधिक रेत और मिट्टी यहां से खोदकर निकाली गई। मिट्टी ट्रैक्टर-ट्राली पर लाद कर कुछ शिविरों के लिए आवंटित जमीनों के दलदल पाटने के लिए ले जाई जाती रही। वहां खोदाई करा रहे लोगों ने बताया कि पीडब्ल्यूडी की ओर से दलदल पाटने के लिए रेत की खोदाई कराई जा रही है। उधर, मेला डिवीजन के सहायक अभियंता सत्येंद्र नाथ ने बताया कि दलदल पाटने और समतल करने के लिए मिट्टी निकालने को मेला प्रशासन की ओर से पीडब्ल्यूडी के लिए स्थान निर्धारित किया गया है। दलदल पाटने के लिए ओल्ड जीटी के पास से पीडब्ल्यूडी मिट्टी की खोदाई करवा रहा है। संगम नोज पर पीडब्ल्यूडी के नाम पर खोदाई कराने वालों को चिह्नित किया जाएगा।