पूरे हुए कायस्थ पाठशाला के 150 बरस
0 18 शैक्षिक संस्थाएं, छात्रावास, न्यास संचालित, पढ़ रहे बीस हजार विद्यार्थी
प्रयागराज। शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए बहादुरगंज मोहल्ले में एक छोटी सी कोठरी से तीन दिसंबर 1872 को आरंभ कायस्थ पाठशाला ने आज 150 बरस पूरे करते हुए वटवृक्ष का रूप ले लिया है। इससे 18 शैक्षिक संस्थाएं, छात्रावास, न्यास आदि संचालित हैं, जिनके माध्यम से नर्सरी से लेकर परास्नातक एवं पीएचडी तक की कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। इनके संस्थाओं में कला, विज्ञान, वाणिज्य, विधि, कृषि संकायों के अध्यापन के साथ तकरीबन बीस हजार विद्यार्थियों को शिक्षा दी जाती है। यहां से अब तक लाखों विद्यार्थियों ने पढ़ाई करके कला, विज्ञान, राजनीति, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, खेल आदि क्षेत्रों में मान बढ़ाया है।
कायस्थ पाठशाला का मुख्यालय प्रयागराज में है लेकिन लखनऊ, वाराणसी, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, कड़ा, सीतापुर, बिसवां, बांदा, चित्रकूट, प्रतापगढ़ आदि जिलों में इसकी संपत्तियां हैं। दरअसल इसके संस्थापक मुंशी कालीप्रसाद कुलभास्कर नामी वकील थे। वकालत में लाखों रुपये की धनराशि सहित पारिश्रमिक तथा पुरस्कार के रूप में उन्होंने चल-अचल संपत्ति भी अर्जित की थी। उनके कोई संतान नहीं थी सो उन्होंने अपनी सभी चल-अचल संपत्ति पाठशाला के निमित्त दान कर दी थी। इसमें सभी कोठियों और जमीन जायदाद सहित दैनिक प्रयोग में आने वाली वस्तुएं भी शामिल थीं।
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जो रहे कायस्थ पाठशाला से जुड़े
कायस्थ पाठशाला की विभिन्न संस्थाओं से पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा, सांसद जनार्दन प्रसाद द्विवेदी, महर्षि महेश योगी, गणेश शंकर विद्यार्थी आदि ने शिक्षा प्राप्त की तो पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री, मशहूर शायर रघुपति सहाय फिराक गोरखपुरी, पं.बालकृष्ण भट्ट,डॉ.हरिवंश राय बच्चन आदि किसी न किसी रूप में जुड़े रहेे।
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सामाजिक सेवा के क्षेत्र में भी न्यास
शैक्षणिक उद्देश्यों के अतिरिक्त केपी ट्रस्ट मेधावी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति, जरूरतमंद परिवारों की कन्याओं के विवाह में आर्थिक सहयोग भी करता है। ट्रस्ट की ओर से एंबुलेंस की नि:शुल्क सुविधा के साथ ही जनऔषधि केंद्र भी खोला गया है।
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महादेव प्रसाद का योगदान भी अतुलनीय
कायस्थ पाठशाला को चौधरी बाबू महादेव प्रसाद ने भी अपनी अरबों रुपये की संपत्ति दान कर दी थी। वर्ष 1914 में वसीयत करते हुए उन्होंने चौधरी महादेव प्रसाद ट्रस्ट को इसका अध्यक्ष बना दिया। उनसे प्रेरित होकर अन्य दानदाताओं ने भी अपनी संपत्ति ट्रस्ट को दान की थी।