अभिभावकों के प्रश्न ज्यादा बड़े हैं...
प्रयागराज के क्षेत्रीय केंद्र में 23 जिलों के 87 विद्यार्थी जवाब देने के लिए बुलाए गए थे। उनके साथ आए अभिभावकों ने परीक्षा केंद्रों में नोट पहुंचने और कॉपी बिना चेक किए जमा कराने को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जो शिक्षक और कक्ष निरीक्षक विद्यार्थियों के दिमाग में यह बात बैठा रहे हैं कि ज्यादा नंबर पाने के लिए कॉपियों में नोट रखना चाहिए, उनकी पहचान की जानी चाहिए। उनका सवाल यह भी है कि जिन छात्रों को बुलाया गया है और कॉपी में नोट मिलने पर लिखित में जवाब लिया जा रहा है, उनके स्कूल-कॉलेजों में पढ़ाई के स्तर की भी पड़ताल होनी चाहिए। नकल रोकने के लिए लगाए गए सीसीटीवी कैमरे और कक्ष निरीक्षकों की सजग आंख परीक्षा कक्ष में नोटों की आमद नहीं रोक पा रही, तो इससे पूरी परीक्षा ही सवालों के घेरे में आ जा रही है।
सवाल पूरे सिस्टम से है...
वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षाओं में कॉपियों में नोट मिलने के करीब 400 मामले परीक्षकों ने पकड़े और ऊपर सूचित किया। न जाने कितने मामले ऐसे भी होंगे जो सूचित करने से रह गए होंगे। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि ज्यादा अंक पाने की होड़ ने परीक्षा प्रणाली को लचर किया है अथवा परीक्षा का उपहास बनाने के लिए यह खेल जान बूझकर किया जा रहा है। इस मसले को केवल पूछताछ और बच्चों की सजा तक सीमित नहीं रखना चाहिए। चूंकि अभिभावकों की ओर से सवाल पूरे सिस्टम पर उठाया जा रहा है, इसलिए इसके पीछे की पूरी साजिश को बेनकाब करने की जरूरत है।