पदक विजेता प्रतीक्षा पटेल के साथ यूपी एथलेटिक्स संघ के उपाध्यक्ष शमशाद निसार आजमी और पिता रामआधर।
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तमिलनाडु के कोयंबटूर के नेहरू स्टेडियम में खेली जा रही 38वीं राष्ट्रीय जूनियर खेल प्रतियोगिता में बृहस्पतिवार का दिन भी प्रयागराज के नाम रहा। शहर के चार खिलाड़ियों ने विपरीत स्थितियों को मात देकर न सिर्फ पदक पर कब्जा जमाया बल्कि पोल वाल्ट में कुलदीप यादव ने जूनियर नेशनल का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। इन खिलाड़ियों के संघर्ष, जुनून और इनकी मेहनत ने इन्हें कामयाबी की दहलीज तक पहुंचाया। पेश है इन चारों खिलाड़ियों के संघर्ष की गाथा...
प्रतीक्षा पटेल -जैवलिन थ्रो-कांस्य पदक
बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय जूनियर खेल में जैवलिन थ्रो की स्पर्धा में 44.12 मी. की दूरी पर भाला फेंककर जिस प्रतीक्षा पटेल ने कांस्य पदक अपने नाम किया, उसने बीते डेढ़ वर्ष से घर की दहलीज तक नहीं देखी। उसका जुनून ऐसा था कि वह मेडल के सपने देखने लगी थी।
मऊआइमा के मगनपुर गांव की प्रतीक्षा के खेल की शुरुआत की कहानी भी दिलचस्प है। गांव के ही एथलीट अरुण पटेल को एथलेटिक्स की राष्ट्रीय स्पर्धा में पदक जीतने पर नौकरी मिल गई। यह देख प्रतीक्षा के पिता सुल्तानपुर में फायर ब्रिगेड में सिपाही रामआधार पटेल में भी बच्चों को खेल के क्षेत्र में भेजने का शौक पैदा हुआ। हालांकि वह एथलेटिक्स के बारे में कुछ नहीं जानते थे।
अरुण ने सलाह दी कि वह बच्चों को जैवलिन थ्रो का अभ्यास कराएं। रामआधार ने पहली दफा इसका नाम सुना था। इसके बाद जब अरुण गांव लौटे तो रामआधार ने कैमरामैन बुलाकर अरुण के अभ्यास सहित अन्य तकनीकी बातों को कैद कराया। साथ ही सुझाव भी रिकार्ड कराए। उसी सीडी से रामआधार ने अपनी बेटी प्रतीक्षा और बेटे गौरव पटेल को प्रशिक्षित करना शुरू किया।
शु्रू में न तो प्रतीक्षा तैयार थी न ही गौरव, पिता की डांट से दोनों सुबह पांच बजे उठने लगे। वर्ष 2017 में राज्य स्तर की पहली ही प्रतियोगिता में प्रतीक्षा ने स्वर्ण पदक जीतकर पिता के चेहरे पर चमक ला दी, फिर उसने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा।अमर उजाला से बातचीत में प्रतिभा बोली, लोगों के कहने पर मां कई बार खेल को छोड़ने को कहतीं पर मैंने निर्णय लिया, मां से बात ही नहीं करूंगी। पिता से ही बातचीत होती थी।
अब पदक ले जाकर उन्हें पहनाऊंगी, तभी बताऊंगी। बोली, वर्ष 2019 में चोट का शिकार हो गई थी। लगा अपना खेल खो दिया है। लेकिन, पिता और कोच जयवीर चौधरी ने मेरा मनोबल बढ़ाया, जिसके बाद मैंने वापसी की। घर में मांसाहार का इस्तेमाल कोई नहीं करता सो पिता ने हम भाई-बहन को अलग कमरा दिया। उसी में मैं और मेरा भाई मांसाहार बनाते और खाते हैं। फिर सफाई भी खुद करनी हूं, खेल के लिए इतना तो करना ही पड़ेगा।
रजत पदक विजेता आर्य देव।
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आर्यदेव-पोल वाल्ट-रजत
मदन मोहन मालवीय स्टेडियम के आर्य देव ने जूनियर नेशनल की पोल वाल्ट की स्पर्धा में रजत पदक जीता है। उन्होंने 4.40 मीटर की छलांग लगाकर यह उपलब्धि बटोरी है। मऊआईमा के गदियानी गांव के आर्य बताते हैं, गांव में एथलेटिक्स के कई खिलाड़ी हैं। रिश्तेदार खिलाड़ी कुलदीप यादव ने वर्ष 2019 में पदक जीता तो उनके पिता का खूब सम्मान हुआ।
इसे देखकर मेरे मन में पिताजी का सम्मान कराने का सपना पैदा हो गया। गांव में जहां सारे खिला़ड़ी अभ्यास करते थे, वहीं जाकर मैं भी अभ्यास करने लगा। फिटनेस के लिए सुबह-शाम दौड़ता भी था। गांव के लोग ताने मारते थे कि यह बस दौड़ता रहेगा, इसका कुछ भी नहीं होने वाला है।
यह सब सुनकर टूटने के बजाय और मजबूत होता गया। ठान लिया कि इन सभी का मुंह बंद कर देना है। किसान पिता अर्जुन प्रसाद और मां मीना देवी ने कई बार खेल छोड़कर कोई काम-धंधा करने की बात कही। लेकिन बड़े पिताजी सरजू प्रसाद की प्रेरणा से मेरा पूरा फोकस खेल पर ही था। पहली बार ही जूनियर नेशनल में प्रतिभाग किया और रजत पदक पर कब्जा जमा लिया। घरवाले भी बेहद खुश हैं। अगला लक्ष्य यूथ नेशनल और यूथ एशियन का है। मैं वहां भी पदक जीतकर ही लौटूंगा।
पोल वाल्ट में गोल्ड जीतने वाले कुलदीप कुमार यादव सबसे बाएं नीली जर्सी में।
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कुलदीप कुमार यादव - पोल वाल्ट - स्वर्ण
नवंबर की पहली तारीख को ही गोवा में सीनियर राष्ट्रीय खेल में पोल वाल्ट की स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाले कुलदीप ने फिर से बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। एक ही पखवाड़े के भीतर दो पदक जीतने वाले कुलदीप ने जूनियर नेशनल में 5.17 मी. की छलांग लगाकर कीर्तिमान स्थापित किया।
दर्द से कराहने के बावजूद कुलदीप न सिर्फ मुकाबले में उतरे, बल्कि रिकॉर्ड छलांग लगाकर उत्तर प्रदेश की झोली में स्वर्ण पदक डाल दिया। मऊआइमा के अलावलपुर के रहने वाले कुलदीप के पिता सुरेश यादव दूध बेचने का काम करते हैं। मां सुषमा घरेलू महिमा हैं। तीन अन्य भाई भी राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हैं। मदन मोहन मालवीय स्टेडियम में कोच देवी प्रसाद और सत्येंद्र सिंह से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले कुलदीप की इस सफलता पर उत्तर प्रदेश एथलेटिक्स संघ के उपाध्यक्ष शमशाद निसार आजमी और पीके श्रीवास्तव व अविनाश दुबे ने बधाई दी है।
पोलवाल्ट में कांस्य पदक जीतने वाले पवन यादव सफेद जर्सी में।
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पवन यादव - पोल वाल्ट - कांस्य
जून में भोपाल में आयोजित 66वीं स्कूल नेशनल एथलेटिक्स प्रतियोगिता में दोस्त से उधार पोल ले जाकर स्वर्ण पदक जीतने वाले पवन ने घर पर जूनियर नेशनल की तैयारी के लिए नए पोल की जिद कर डाली। किसान पिता शिवभजन यादव ने किसी तरह पैसों की व्यवस्था करने नया पोल खरीदा। इसी नए पोल से जब बृहस्पतिवार को पवन ने जूनियर नेशनल में कांस्य पदक जीता तो उनके चेहरे की चमक तो थी ही, पिता भी सुनकर भावुक हो उठे।
मऊआइमा के गहरपुर मलावा के रहने वाले पवन ने 4.60 मी. की छलांग लगाकर यह पदक अपने नाम किया। मदन मोहन मालवीय स्टेडियम में देवी प्रसाद व सत्येंद्र सिंह से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले पवन ने बताया,आर्थिक तंगहाली ने कई बार खेल को छोड़ने पर मजबूर किया लेकिन हर बार इसी उम्मीद इसी सपने के साथ मैदान पर उतरा कि जीत जाऊंगा तो हालात बदल जाएंगे। अगला लक्ष्य सीनियर नेशनल में मेडल जीतने के साथ ही यूथ नेशनल में भी बेहतर प्रदर्शन करने का है।