इन पर गिरी गाज
एसआई महावीर सिंह- पूर्व प्रभारी, नारकोटिक्स सेल
एसआई राजीव श्रीवास्तव- चौकी प्रभारी, लीडर रोड
एसआई विश्वेंद्र यादव- चौकी प्रभारी, सूरजकुंड
एसआई वरुणकांत प्रताप सिंह- प्रभारी सर्विलांस सेल
आरक्षी संतोष कुमार यादव, अनुराग यादव, जयकांत पांडेय, अवनीश शर्मा- नारकोटिक्स सेल
अवैध वसूली की संभावना से इंकार नहीं
पुलिस का कहना है कि जानसेनगंज स्थित लॉज से आठ संदिग्धों को पूछताछ के लिए कोतवाली लाया गया था। रात में ही पूछताछ कर इन सभी को छोड़ दिया गया। इनका नाम-पता पुलिस अभिलेखों में नहीं दर्ज किया गया। साथ ही उच्चाधिकारियों को भी इसकी जानकारी नहीं दी गई। ऐसे में कार्रवाई करने वाली टीम की ओर से अवैध वसूली किए जाने की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता।
किसी भी पुलिसकर्मियों की अपराधियों से सांठगांठ का मामला सामने आने पर जांच कराकर सत्यता के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - अजय कुमार, एसएसपी
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कोतवाली इंस्पेक्टर की भूमिका की जांच जारी
इस प्रकरण में कोतवाली इंस्पेक्टर नरेंद्र प्रसाद की भूमिका पर भी सवाल खड़े हुए थे और अफसरों का कहना है कि उनके खिलाफ जांच जारी है। सूत्रों का कहना है कि मामला कोतवाली थाने का है लेकिन इस संबंध में इंस्पेक्टर की ओर से भी अफसरों को जानकारी नहीं दी गई। अफसरों का कहना है कि मामले में इंस्पेक्टर की भूमिका की जांच जारी है। जांच रिपोर्ट मिलने पर सत्यता के आधार पर शेष कार्रवाई की जाएगी।
यह था पूरा मामला
हिमांचल का कुख्यात अपराधी डेविड पुलिस कस्टडी से फरार होकर शहर में जानसेनगंज स्थित वृंदावन लॉज में छिपकर फरारी काट रहा था। इसकी सूचना पर 27 फरवरी को हिमांचल प्रदेश की पुलिस शहर पहुंची और उपरोक्त पुलिसकर्मियों के साथ दबिश दी। इस दौरान डेविड तो नहीं मिला लेकिन उसके ससुर समेत आठ शरणदाता मौके से पकड़ लिए गए। जिन्हें कोतवाली थाने ले जाया गया लेकिन कुछ घंटों बाद ही सभी को छोड़ दिया गया था।