जिला न्यायालय ने 27 साल पहले हुई दलित की हत्या का आरोप साबित होने पर आरोपित कल्लू और इलाहाबादी मियां उर्फ शमशाद अहमद को उम्रकैद और 10-10 हजार के जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माने की धनराशि जमा होने पर आधी धनराशि मृतक की पत्नी को दिए जाने का आदेश दिया है। यह निर्णय विशेष न्यायाधीश एससी एसटी एक्ट रामकेश ने लोक अभियोजक अखिलानंद द्विवेदी, वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी गुलाब चंद्र सरोज को सुनकर दिया है।
घटना छह सितंबर 1994 की थाना सराय इनायत के नीबी कला गांव की है। वादी राम फल ने भल्लू, कल्लू, लवकुश दुबे और इलाहाबादी मियां के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि आरोपी उसके बेटे राम जी को घर से बुला कर ले गए थे। संदेह होने पर वह लोग भी पीछे-पीछे गए थे।
घर से कुछ दूर जाने के बाद बचाने की आवाज आई। पास जाने पर देखा तो अभियुक्तगण उसके पुत्र को तमंचे की बट और चाकू से मार रहे थे, जिससे उसकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। आरोपी भल्लू और लवकुश दुबे की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है।