जिला न्यायालय ने मानव तस्करी के जरिए देश के कई हिस्सों से बालिग एवं नाबालिग लड़कियों को लाकर उनकी मर्जी के खिलाफ वेश्यावृत्ति कराए जाने के मामले में 41 अभियुक्तों को दोषी करार दिया है। न्यायालय 25 जनवरी को सजा के बिंदु पर सुनवाई करेगा। सभी आरोपी फिलहाल नैनी सेंट्रल में बंद हैं।
यह आदेश अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रचना सिंह ने विशेष लोक अभियोजक आरपी सिंह, जिला शासकीय अधिवक्ता गुलाब चंद्र अग्रहरी, एडीजीसी अमित मालवीय एवं संस्था के अधिवक्ता गोपाल कृष्ण को सुनकर दिया है। प्रकरण थाना कोतवाली स्थित बादशाही मंडी रेड लाइट एरिया मीरगंज का है। सामाजिक संस्था के कार्यकर्ता सुनील कुमार की शिकायत पर 48 अभियुक्तों के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
इन अभियुक्ताें में 33 महिलाएं थीं। एक मई 2016 को उप जिला मजिस्ट्रेट सदर की अगुवाई में रेड लाइट एरिया में दबिश देकर कई युवतियों को अभियुक्तों के चंगुल से मुक्त कराया गया। इस प्रकरण में सरकार बनाम दुर्गा कामले सहित 48 अभियुक्तों के खिलाफ सत्र न्यायालय में विचारण किया गया।
अभियुक्तों पर आरोप है कि मानव तस्करी के माध्यम से देश के कई हिस्सों से बालिग व नाबालिग लड़कियों को लाकर बंधक बनाकर वेश्यावृत्ति कराई जाती थी। उनकी खरीद-फरोख्त की जाती थी। पीड़िताओं ने अपने बयान में कहा था कि उनको उनके मूल स्थान से बहला फुसलाकर व लालच देकर यहां लाया गया। शारीरिक शोषण व जबरन देह व्यापार कराया जाता है।
न्यायालय ने कुल 41 अभियुक्तों को अनैतिक व्यापार अधिनियम 1956 और भारतीय दंड संहिता की धारा 370 और 373 के अपराध में दोष सिद्ध पाया है। मुकदमे के दौरान छह अभियुक्तों की मृत्यु हो गई और एक अभियुक्त की पत्रावली अलग कर दी गई है। प्रकरण को शीघ्र निस्तारित करने के लिए उच्चतम न्यायालय ने निर्देश जारी किया था। कोर्ट द्वारा सजा के लिए 25 जनवरी को सुनवाई की जाएगी।